बलोच विद्रोहियों ने बम से उड़ाई 'अंग्रेजों के एजेंट' मोहम्मद अली जिन्ना की प्रतिमा

27 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रतिमा बम से उड़ाई

इस्लामी मुल्क पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में इस मुल्क के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की एक प्रतिमा को स्थानीय बलोच लड़ाकों द्वारा बम से उड़ा दिया गया। यह प्रतिमा बलूचिस्तान प्रांत के दक्षिण पश्चिमी इलाके ग्वादर में स्थित थी।

पड़ोसी देश पाकिस्तान में आतंकी हमले और उपद्रव होना कोई नई बात नहीं है। फिर चाहे मदरसे हों, स्कूल या मस्जिद। इस देश में बम विस्फोट होना एक आम सी बात बन चुकी है। स्थानीय लोगों की मानें तो पश्चिमी पाकिस्तान में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों के कई इलाके पाकिस्तानी प्रशासन ने सेना के बलपूर्वक कब्ज़े में ले रखे हैं। यहाँ के लोग स्वयं को पाकिस्तानी बताने तक से इनकार करते हैं और आज़ादी की माँग करते रहते हैं।

इसी के चलते बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में समय-समय पर पाकिस्तानी सेना के साथ ये बलोच विद्रोही संघर्ष करते भी पाए जाते हैं। ऐसी ही एक घटना में रविवार (26 सितंबर, 2021) को बलूचिस्तान के ग्वादर क्षेत्र में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की एक प्रतिमा को इन बलूचों द्वारा निशाना बनाया गया। यह घटना सुबह के करीब 9:20 पर हुई।

बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने ली ज़िम्मेदारी 

मुस्लिम लीग के नेता रहे जिन्ना की यह प्रतिमा इसी साल ही बनाई गई थी एवं जहाँ यह स्थापित थी उस क्षेत्र को भी काफी सुरक्षित माना जाता है। बावजदू भी इसे ध्वस्त करने वाले लोग पर्यटक के रूप में उस क्षेत्र में घुसे और प्रतिमा के नीचे विस्फोटक लगा कर उसे उड़ा दिया।

इस कृत्य जिम्मेदारी बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने ली है। इस संगठन के प्रवक्ता बबगर बलोच ने ट्वीट करके इस हमले की जिम्मेदारी लेने की बात साझा की।

पूरे मामले को लेकर पाकिस्तान में अफरा-तफरी है एवं नेताओं और प्रशासन समेत सभी इसकी उच्च स्तरीय जाँच की माँग कर रहे हैं।

इस मामले पर बलूचिस्तान के सीनेटर सरफराज बुगती ने ट्वीट करते हुए इस मामले को पाकिस्तान की विचारधारा पर हमला बताया साथ ही बुगती ने कहा कि इस हमले के आरोपितों को उसी प्रकार सज़ा दी जानी चाहिए जिस तरह कायदे आज़म के ज़ियारत स्थित घर पर हमला करने वालों को दी गई थी।


बता दें कि वर्ष 2013 में बलूचिस्तान प्रांत के ही ज़िले ज़ियारत में मोहम्मद अली जिन्ना के 121 साल पुराने घर पर हमला किया गया था।

जिन्ना को बताया ‘अंग्रेज़ी एजेंट’

पूरे मामले को लेकर बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने भी अपने विचार सामने रखे। इन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को अंग्रेजों का एजेंट बताते हुए केवल अपनी राजनीति साधने के लिए बलोची ज़मीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया।

आगे इस संगठन ने यह भी कहा कि जिन्ना के साथ-साथ पाकिस्तानी आर्मी ने भी बलूचिस्तान पर आक्रमण किया था। अपने बयान में बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने कहा:

“ग्वादर के मरीन ड्राइव पर स्थित मोहम्मद अली जिन्ना की प्रतिमा को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी हम लेते हैं। आज सुबह ही हमारे लोगों ने जिन्ना की प्रतिमा को बम से उड़ाया है। जिन्ना एक अंग्रेजी सरकार का एजेंट था। जिस तरह से मोहम्मद अली जिन्ना ने 27 मार्च, 1948 को पाकिस्तानी सेना को कब्जे में लेने के बाद बलोच भूमि पर भी बलपूर्वक कब्ज़ा किया इसीलिए बलोच राष्ट्र जिन्ना के जीवन को उनकी चालाक राजनीति के कारण घृणा और तिरस्कार की दृष्टि से देखता है।”

पाकिस्तान रिपब्लिकन आर्मी कहती है कि पाकिस्तान जिन्ना को आने वाली बलोच पीढ़ियों के सामने एक नायक की तरह प्रस्तुत करना चाहता है, परन्तु बलूची बच्चा-बच्चा पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे इस प्रोपेगेंडा की सच्चाई जानता है।

पाकिस्तानी पुलिस प्रशासन अभी मामले की जाँच में व्यस्त बताया जा रहा है और अभी तक कोई बड़ी गिरफ्तारी की भी खबर सामने नहीं आई है।



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