राजनीति की किंवदंती बन चुके हैं नरेंद्र मोदी, ब्रिगेड ग्राउंड की भीड़ ही बंगाल का एग्जिट पोल है

08 मार्च, 2021
ब्रिगेड ग्राउंड में पीएम मोदी (चित्र साभार: डेक्कन हेराल्ड)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक मेगा रैली को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने मंच पर पहुँचकर सबसे पहले यही कहा कि ‘मैं हैलीकॉप्टर से देख रहा था, मैदान ही नहीं बल्कि सड़कें भी पूरी तरह भरी हुई हैं’। बंगाल में आठ चरणों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बंगाल में यह पहली रैली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस रैली में उमड़ी भीड़ ने ब्रिगेड ग्राउंड के इतिहास को बदलने का कारनामा भी कर दिया है। ये वही ब्रिगेड ग्राउंड है, जहाँ कभी प्लासी के युद्ध में विजय हासिल करने के बाद ब्रितानी सैनिकों का राज हुआ करता था और फिर वाम दलों के उत्कर्ष का केंद्र बन गया। यह नरेंद्र मोदी का ही करिश्मा है कि जो ब्रिगेड ग्राउंड इतिहास में सिर्फ रक्तपिपासु वामदलों के उत्कर्ष का साक्षी रहा, वो आज ‘जय श्री राम’ के नारे और भगवा रंग से पटा हुआ है।

सवाल ये है कि आखिर ये भीड़ है कौन? ये भीड़ वही है, जिसे विपक्षी दल आज से नहीं बल्कि वर्ष 2014 के आम चुनावों से ही अनपढ़, अंधभक्त और EVM की गलती बताता आ रहा है। विपक्ष ने मानो अपनी तमाम शक्ति लोकतंत्र को संघी और अनपढ़ साबित करने में झोंक दी और इसका ही नतीजा बंगाल में नरेंद्र मोदी की रैलियों में उमड़ने वाली ये भीड़ है। ये भीड़ बता रही है कि भाजपा ने बंगाल को आधा आज जीत लिया है। इसके बाद की चुनाव प्रक्रिया बस एक औपचारिकता मात्र रह जाएगी।

ये पीएम मोदी का आत्मविश्वास ही है कि वो अब जनता से वोट नहीं माँगते, बल्कि सीधा ‘अबकी बार दो सौ पार’ की अपील कर रहे हैं। यह बंगाल में सदियों से चली आ रही तृणमूल की गुंडागर्दी और उस फासीवाद को खुली चुनौती भी कही जा सकती है, जिस पर बहस करने में देश का वाम उदारवादी वर्ग कतराता रहा है। जाहिर सी बात है, भाजपा ने इस बात पर विमर्श करना ही छोड़ दिया है कि देश का वाम-उदारवादी वर्ग किस विषय पर चर्चा कर। यही एक वजह भी मानी जा सकती है कि पीएम मोदी का संबोधन किसी विचारधारा से ना होकर सीधा जनता से ही रहता है।

निश्चित तौर पर, अगर भाजपा बंगाल का यह चुनाव जीतने में कामयाब रहती है तो यह जीत भाजपा के विजयरथ के मार्ग में एक मील का पत्थर साबित होगी। हालाँकि, ममता बनर्जी का आत्मविश्वास वह पहले ही तोड़ चुकी है। फिर भी, यदि किन्हीं कारणों से भाजपा बंगाल में आँकड़ों में मात खाती है, तब भी आज की भीड़ ममता को भविष्य के लिए खूब सारी चिंता देने के लिए काफी मानी जा सकती है।



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