परमबीर सिंह ने छिपाया था आतंकी कसाब का मोबाइल फोन: मुंबई पुलिस के रिटायर्ड अफसर पठान का खुलासा

25 नवम्बर, 2021
रिटायर्ड एसीपी पठान ने कहा कि आतंकी कसाब का फोन परमबीर सिंह ने छिपाया था

मुम्बई पुलिस के रिटायर्ड ACP ने एक बड़ा खुलासा करते हुए मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Parambir Singh) पर आतंकवादी कसाब (Kasab) की मदद करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि साल 2008 में हुए 26/11 आतंकी हमले में शामिल एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब की मदद भी परमबीर ने ही की थी।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर महाराष्ट्र पुलिस के रिटायर्ड ACP शमशेर खान पठान (Shamsher Khan Pathan) ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान ने खुलासा किया है कि कसाब के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ था जिसकी सहायता से वो पाकिस्तान और भारत मे बैठे अपने मददगारों से सम्पर्क में थे।

उन्होंने आरोप लगाया है कि कसाब के पास से मिले फोन को परमबीर सिंह ने अपने पास रख लिया था और उसे कभी जाँच अधिकारियों को नहीं सौंपा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ कसाब ही नहीं परमबीर सिंह ने कथित तौर पर कुछ अन्य आतंकियों और उनके हैंडलर्स की मदद करने के साथ-साथ कई मामलों में मुम्बई हमलों में शामिल आतंकियों के खिलाफ सबूत भी मिटाए।

ये आरोप शमशेर खान पठान ने चार पन्नों की एक शिकायत में लगाए हैं जो उन्होंने मुंबई के मौजूदा पुलिस कमिश्नर को भेज कर जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने इस मामले की जानकारी तत्कालीन कमिश्नर वेंकेटेशम को भी दी थी लेकिन उन्होंने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

पुलिस कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में है सनसनीखेज आरोप

शमशेर खान ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखी शिकायती चिट्ठी में बताया है कि साल 2007 से 2011 के बीच वे पाईधूनी पुलिस स्टेशन में बतौर सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर तैनात थे। उनके बैचमेट एनआर माली बतौर सीनियर इंस्पेक्टर डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में पोस्टेड थे और दोनों का अधिकार क्षेत्र मुंबई जोन-2 में आता था।

चिट्ठी में कहा गया है कि 26/11 के दिन अजमल आमिर कसाब को गिरगाँव चौपाटी इलाके में पकड़ा गया था। इसकी जानकारी जब मुझे हुई तो मैंने अपने साथी एनआर माली को फोन किया था और माली ने मुझे बताया कि अजमल कसाब के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ है।

पत्र में रिटायर्ड अफसर ने लिखा है कि एनआर माली ने उन्हें बताया कि यहाँ पर कई बड़े अधिकारी आए हुए हैं, जिसमें ATS के तत्कालीन चीफ परमबीर सिंह भी हैं।

माली के मुताबिक, यह फोन कॉन्स्टेबल कांबले के पास था और उससे ATS के चीफ परमबीर सिंह ने लेकर अपने पास रख लिया था। पठान के दावे के मुताबिक मोबाइल फोन इस मामले का सबसे अहम सबूत था क्योंकि इसी फोन से कसाब पाकिस्तान से निर्देश पा रहा था।

यह फोन उसके पाकिस्तान और हिन्दुस्तान में उनके हैंडलर को पकड़वा सकता था लेकिन बाद में मुझे पता चला कि ये फोन तो जाँच में शामिल ही नहीं किया गया था।

कभी नहीं मिला कसाब का फोन

इस केस की जाँच मुंबई क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर महालय कर रहे थे और परमबीर सिंह की ओर से यह मोबाइल फोन उन्हें सौंपा ही नहीं गया था। कोर्ट में भी ये बताया गया था कि कोई फोन बरामद नहीं हुआ। हमें संदेह था कि मोबाइल फोन में आतंकियों के पाकिस्तान और भारत में मौजूद हैंडलर के अलावा भारत के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के संपर्क नंबर भी हो सकते हैं।

यदि फोन मुंबई क्राइम ब्रांच को उस समय दिया गया होता, तो शायद और अधिक महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करने की स्थिति में हम होते, क्योंकि 26 तारीख के बाद भी आतंकी अपने हमले को जारी रखे हुए थे।

मैंने इसकी बाबत इंस्पेक्टर माली से बात की थी और उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने इस बाबत मुंबई दक्षिण क्षेत्र के आयुक्त वेंकटेशम से मुलाकात कर उनसे परमबीर से वह फोन लेने और उसे संबंधित जाँच अधिकारी को जाँच के लिए देने को कहा था।

मोबाइल के बारे में पूछने पर आगबबूला हो गए थे परमबीर!

पठान ने चिट्ठी में लिखा है,

“मैं रिटायर हो चुका हूँ और आजकल समाज सेवा का काम कर रहा हूँ। माली भी अब असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर की पोस्ट से रिटायर्ड हो चुके हैं। इस बारे में कुछ दिन पहले मैंने फिर से जब माली से पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि वे इस सबूत की बात करने तत्कालीन ATS चीफ परमबीर सिंह के पास गए थे।”

उन्होंने परमबीर से इस सबूत को क्राइम ब्रांच को सौंपने को भी कहा था, लेकिन परमबीर उल्टे उन पर ही भड़क गए। उन्होंने खुद के सीनियर होने की बात कहते हुए डाँट कर माली को अपने ऑफिस से निकाल दिया था। इस घटना की जानकारी कमिश्नर वेंकेटेशम को दिए जाने के बावजूद उन्होंने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

माली ने इस पूरे मामले में अपनी व्यक्तिगत जाँच जारी रखी और आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाला तो उसमें लिखा गया था कि कसाब के पास से कोई भी फोन बरामद नहीं हुआ था।

इसका मतलब यह था कि मोबाइल फोन मिला था और उसे क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर महाले को नहीं सौंपा गया था। यह साबित करता है कि परमबीर सिंह ने सबूतों को नष्ट किया और इस पूरी आतंकी साजिश में वह देश के दुश्मनों के साथ शामिल थे।



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