नाम हटाना है तो नेहरू से शुरू करें, हमें अपने PM पर गर्व है: वैक्सीन सर्टिफिकेट बवाल पर केरल HC

13 दिसम्बर, 2021
केरल उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि PM मोदी की तस्वीर को कोविड वैक्सीन प्रमाण पत्र पर छापने में क्या गलत है?

केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार (13 दिसम्बर, 2021) को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता से सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को कोविड वैक्सीन प्रमाण पत्र पर छापने में क्या गलत है? याचिका में कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर पर आपत्ति जताते हुए इसे हटाने की माँग की गई थी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से बार-बार पूछा कि वह देश के नागरिकों द्वारा चुने गए पीएम के लिए शर्मिंदा क्यों दिख रहे हैं? जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने याचिकाकर्ता मौखिक रूप से पूछा, “आपको अपने प्रधानमंत्री पर शर्म क्यों आती है? 100 करोड़ लोगों को इससे कोई समस्या नहीं है, तो आप को क्यों है?”

दरअसल हाईकोर्ट आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसने एक निजी अस्पताल में भुगतान कर के कोविड वैक्सीन लगवाई थी। टीकाकरण के बाद उन्हें एक वैक्सीन प्रमाण पत्र मिला जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ संदेश था, “दवा और सख्त नियंत्रण, भारत मिलकर COVID-19 को हराएगा।”

याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट अजीत जॉय ने तर्क दिया कि कोविड प्रमाणपत्र पर पीएम की तस्वीर चिपकाना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, खासकर जब उन्होंने टीकाकरण के लिए भुगतान किया है।

एडवोकेट जॉय ने यह तर्क भी दिया कि यह उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है, जिसमें भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा संरक्षित जबरन सुनने का अधिकार भी शामिल है।

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने याचिकाकर्ता के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप में काम करने को लेकर स्पष्टीकरण माँगा कि वैक्सीन प्रमाणपत्रों पर वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को शामिल करना पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के नाम पर एक विश्वविद्यालय के नामकरण से कैसे भिन्न है?

JNU से नेहरू का नाम हटवाने को क्यों नही कहते: हाईकोर्ट

याचिका पर विचार करते हुए न्यायाधीश ने मौखिक रूप से पूछा, “यदि प्रधानमंत्री मोदी का नाम वैक्सीन प्रमाणपत्र पर है तो क्या समस्या है तो आप जवाहरलाल नेहरू के नाम पर बने एक संस्थान में काम करते हैं, वह भी एक प्रधानमंत्री थे। आप विश्वविद्यालय से नेहरू का नाम हटाने के लिए क्यों नहीं कहते?”

इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अन्य देशों में जारी टीकाकरण प्रमाणपत्र में उनके देश से संबंधित नेताओं की तस्वीरें नहीं हैं। इस दलील पर जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा, “उन्हें अपने पीएम पर गर्व नहीं है, हमें अपने पीएम पर गर्व है।”

जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा, “वह (मोदी) लोगों के जनादेश के कारण पीएम बने हैं। हमारी अलग-अलग राजनीतिक राय हो सकती है लेकिन वह अभी भी हमारे प्रधानमंत्री हैं।अगर यूनिवर्सिटी में जवाहरलाल नेहरू का नाम हो सकता है तो वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर में क्या गलत है।”

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने कोरोना टीकाकरण प्रमाणपत्रों पर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो हटाने की माँग करने वाली याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि फोटो को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट से हटाने की याचिका एक बहुत ही खतरनाक प्रस्ताव है।

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस जस्टिस एन नागरेश ने मौखिक रूप से कहा था –

“यह एक बहुत ही खतरनाक प्रस्ताव है। कल कोई यहाँ आकर विरोध कर सकता है कि वे महात्मा गाँधी को पसंद नहीं करते हैं और हमारी करेंसी से उनकी तस्वीर को हटाने की माँग कर सकते हैं। ये कहते हुए कि यह उनका खून और पसीना है और वे उनका चेहरा इस पर नहीं देखना चाहते हैं। तब क्या होगा?”



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