तो क्या 'पोर्न' व 'इरोटिक' के खेल के बीच अस्पष्ट नियमों के चलते बच निकलेंगे राज कुंद्रा?

23 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
गहना वशिष्ठ(बाएँ) राज कुंद्रा-शिल्पा शेट्टी(दाएँ)

बहुचर्चित अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) के पति राज कुंद्रा (Raj Kundra) को पिछले दिनों पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने राज के घर पर छापामारी की और बताया कि वहाँ से उन्हें करीब 70 पोर्नोग्राफिक फ़िल्में बरामद हुई हैं। इसके साथ ही राज पर पोर्नोग्राफिक यानी अश्लील फिल्में बनाने और बेचने का आरोप लगाया गया है।

राज कुंद्रा की कुछ व्हाट्सऐप चैट्स भी सामने आई हैं, जिनमें वे अश्लील वीडियोज़ के व्यापार से संबंधित बातें करते देखे गए। इस मामले में राज के साथ उनके रिश्तेदार प्रदीप बख्शी भी शामिल है।

क्या बच निकलेंगे राज कुंद्रा ?

राज कुंद्रा के गिरफ्तार होते ही गहना वशिष्ठ उर्फ़ वंदना तिवारी नामक मॉडल सामने आईं और उन्होंने यह तर्क प्रस्तुत किया राज कुंद्रा और उनके द्वारा बनाई जा रही वीडियोज़ पोर्न नहीं बल्कि कामुक (इरोटिक/Erotic) श्रेणी की वीडियो हैं।

गहना ने कहा कि यह उसी तरह के वीडियो हैं जो एकता कपूर जैसी वरिष्ठ निर्माताओं द्वारा भी बनाए जाते हैं। इनमें से कोई भी वीडियो पोर्न की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता।


इसी प्रकार का सामान तर्क राज कुंद्रा के वकील द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने आईपीसी की धारा 67A की बात करते हुए कहा कि राज द्वारा जो फिल्में बनाई जा रही हैं उन्हें पोर्न की श्रेणी में डाला जाना गलत है।

वकील ने न्यायालय में कहा:

“केवल वास्तविक ‘सहवास का कार्य’ ‘वास्तविक संभोग’ को पोर्न माना जा सकता है। बाकी सब सिर्फ अश्लील सामग्री है। इन दिनों जो वेब सीरीज़ दिखा रही है, पुलिस उस अश्लील सामग्री को फॉलो कर रही है, लेकिन यह वास्तव में पोर्न नहीं है। इनमें कहीं नहीं दिखता है कि दो लोग वास्तव में संभोग के कार्य में शामिल थे। यदि यह वास्तविक संभोग नहीं है, तो यह पोर्न नहीं है।”

वकील द्वारा अपने मुवक्किल के लिए इस प्रकार बचाव के तर्क प्रस्तुत करना साधारण सी बात है परंतु सोचने का विषय यह है कि क्या सचमुच राज कुंद्रा द्वारा कुछ अवैध किया जा रहा था या इस मामले को जनता के सामने केवल बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की सख़्ती 

बारीकी से समझा जाए तो इस सब की शुरुआत ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के भारत में तेज़ी से पैर जमाने के साथ ही हो गई थी और इन प्लेटफॉर्म्स पर भारी मात्रा में अश्लील सामग्री का प्रसारण हो रहा है। जिसे लेकर कई लोगों ने सरकार एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय के सामने कुछ समय पहले आवाज़ भी उठाई थी।

इस मामले में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को सेंसर बोर्ड के अंतर्गत लाने पर ज़ोर दिया गया था और इन प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने पाली सामग्री पर सरकार द्वारा पहले निगरानी करने की बातें कही गई थीं। 

पर क्या ओटीटी प्लेटफॉर्म्स सेंसर बोर्ड के अंतर्गत आते हैं ?

आसान शब्दों में इस प्रश्न का उत्तर ‘ना’ है। दरअसल तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस मामले में इन प्लेटफॉर्म्स को ‘सेल्फ रेगुलेशन रूल्स’ बनाने के लिए कहा था।

इसका अर्थ है कि उन्हें स्वयं अपनी निगरानी के लिए कुछ नियम बनाने के निर्देश दिए गए थे। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था:

“ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स को बार-बार सेल्फ रेगुलेशन नियम बनाने के लिए कहा गया था, जैसे कि टीवी ने अतीत में किया है। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए हमने सभी मीडिया के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाने का फैसला किया। फिल्मों के लिए एक सेंसर बोर्ड है, लेकिन ओटीटी के लिए कुछ भी नहीं है। ओटीटी के लिए, सामग्री का स्व-वर्गीकरण होना चाहिए- जैसे 13+, 16+ और A श्रेणियाँ। पैरेंटल लॉक का एक तंत्र होना चाहिए। सेंसर बोर्ड का आचार संहिता सभी के लिए समान रहेगा।”

प्रकाश जावड़ेकर 

इस विषय में ओटीटी के लिए सेंसरशिप नियमों पर मंत्री जावड़ेकर ने कहा था:

“हम फिलहाल ओटीटी पर फिल्मों के लिए सेंसरशिप नहीं ला रहे हैं। हम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के द्वारा स्वयं आयु आधारित वर्गीकरण करने को लेकर इन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा कर रहे हैं।’

बता दें कि सरकार द्वारा ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एक ‘सेल्फ रेगुलेशन बॉडी’ बनाने के लिए कुछ निर्देश भी दिए गए थे।

कितना कारगर है सरकार का कदम ?

राज कुंद्रा जैसे एक मामले का खुलासा यह साफ करता है कि अभी तक इन प्लेटफॉर्म्स पर भारी मात्रा में अश्लीलता परोसी जा रही है। जिस पर किसी प्रकार की कोई नियमावली लागू नहीं हो रही है। ऐसे में सरकार का सेल्फ रेगुलेशन जैसा कदम तो कारगर साबित नहीं होता है। 

सरकार द्वारा इस इस नियमावली के मामले में बहुत से लूपहोल्स यानी बचाव के रास्ते छोड़ दिए गए हैं। इन्हीं का फायदा उठाकर कुछ ऐसे प्लेटफार्म एवं इनके मालिक अवैध व आपत्तिजनक सामग्री बना और दिखा रहे हैं।  

इसमें सरकार को अपने स्तर पर ही कार्य करते हुए चीज़ों को अपने हाथ में होगा तथा सिनेमा और टीवी की भाँति ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए भी स्वयं नियमावली बनाना या सेंसर बोर्ड जैसी किसी संस्था का गठन करना होगा।



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