सस्ती लोकप्रियता, अजेंडा है मकसद: 'वैक्सीन के कागज' से PM मोदी की फोटो हटवाने वाले पर केरल HC ने लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

21 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
केरल उच्च न्यायालय ने कोरोना टीकाकरण सर्टिफिकेट पर मोदी की फोटो हटवाने की माँग करने वाले पर लगाया एक लाख का जुर्माना

सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को केरल उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका आई थी इस याचिका में कोरोना टीकाकरण सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे हटाने की माँग की गई थी।

इस विषय में न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कुछ सवाल किए थे और हाल ही में केरल उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर न्यायालय का समय बर्बाद करने के लिए जुर्माना भी लगाया है।

मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को केरल उच्च न्यायालय ने इस विषय में आगे सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि उसने पैसा देकर कोरोना का टीका लगवाया था।

निजी अस्पताल से टीका लगवाने के बाद भी उसके वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और संदेश था। इसी कारण इस व्यक्ति ने न्यायालय में इस विषय में याचिका दर्ज की, जिसमें उसने कहा है कि वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर होना उसके मौलिक अधिकारों का हनन है।


याचिकाकर्ता के वकील अजीत जॉय ने यह तर्क दिया कि जब एक निजी संस्था से टीकाकरण करवा के सर्टिफिकेट लिया जा रहा है तो सरकार को उस पर प्रधानमंत्री की तस्वीर छापने का कोई अधिकार नहीं है। 

इस मामले में न्यायालय द्वारा कहा गया था:

“वह हमारे प्रधानमंत्री हैं, किसी और देश के नहीं। उन्हें लोगों के मत से चुना गया है। केवल राजनीतिक मतभेद होने के कारण आप इसे चुनौती नहीं दे सकते। आप अपने प्रधानमंत्री को लेकर शर्मिंदा क्यों हैं? जब 100 करोड़ लोगों को इससे कोई आपत्ति नहीं, तो आप ही को क्यों है? सबके अलग-अलग राजनीतिक विचार होते हैं, वे हमारे प्रधानमंत्री हैं। आप न्यायालय का समय बर्बाद कर रहे हैं।”

याचिका के पीछे राजनीतिक एजेंडा 

याचिकाकर्ता के वकील को यह कहने के उपरांत न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर न्यायालय का समय बर्बाद करने के लिए ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया।

इस मामले में याचिका को खारिज करते समय जस्टिस पीवी कुन्शीकृष्णन ने कहा:

“मेरे विचार में यह एक बेकार याचिका है, जिसे अलग उद्देश्यों के साथ दायर किया गया है और मुझे इस बात पर भी गहरा संदेह है कि इस याचिकाकर्ता का इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा है। मेरे हिसाब से यह एक पब्लिसिटी पाने के लिए की गई लिटिगेशन है, इसलिए यह मामला भारी कीमत के साथ खारिज किया जाता है।”



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