रवीश जी स्पष्ट कर दीजिए, TV देखना है या उठा कर बाहर फेंकना है?

04 सितम्बर, 2021 By: पुलकित त्यागी
मीडिया में 'दक्षिण दिल्ली' स्थापित करने का श्रेय रवीश जी को कभी भी जा सकता है

पहले आता है Self Love, फिर आता है Self Obsession, उसके बाद आता है Narcissism और इस आत्ममुग्धता के पिरामिड की चोटी पर खड़े हैं लाल सलामी कबीले के सरदार- राजा रवीश कुमार।

विज्ञान के अनुसार, धरती सूर्य के चारों ओर घूमती है। एक विशेष किताब और विचारकों के अनुसार धरती चपटी है, घूमती ही नहीं है। परन्तु राजा रवीश के अनुसार धरती, सूर्य, समस्त सौरमंडल समेत पूरा ब्रह्माण्ड उन्हीं के चारों ओर घूमता है। और इस पूरी परिक्रमा में ज़रा सी भी अड़चन आ जाए तो इसके गुनहगार मोदी, IT सेल, संघ और गोदी मीडिया होता है। 

पिछले 5-7वर्षों से हफ्ते में 15-15 बार आईटी सेल, संघ जैसे शब्द बोल बोल कर इस मानव कि मनोस्थिति इस हद तक हिल चुकी है कि कई बार तो ऐसा लगता है कि अब अगर इस व्यक्ति की चाय की गर्माहट भी थोड़ी सी ज़्यादा हो जाती होगी तो रवीश चायवाले से शायद कुछ ऐसा कहते नजर आएँगे –

“ज्यादा गरम चाय पिलाकर मेरा मुँह जलाना चाहते हो? ताकि बोल कर प्राइम टाइम न कर सकूँ और मेरी आवाज लोगों तक न पहुँच सके। आईटी सेल से हो या संघी हो? चायवाले हो.. तुम मोदी के एजेंट तो नहीं?”

ऐसे ही एक आत्ममुग्धता से भरे कृत्य का प्रदर्शन रवीश ने हाल ही में किया, जब वे टीवी पर यह कहते दिखे कि एक निजी केबल संस्था ‘हैथवे’ द्वारा उनका चैनल एक पैक से जानबूझकर हटाया गया है ताकि उनकी आवाज लोगों तक पहुँचने से रोकी जा सके।

लोकसभा चुनावों से ठीक पहले टीवी उठाकर घर से बाहर फेंक देने की बातें करने वाले रवीश यह कहते दिखे कि ‘आप अपने केबल वाले को फोन करिए उन से लड़ जाइए कि हमें प्राइम टाइम देखना ही देखना है।’

सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दो रवीश कि टीवी देखना है या नहीं देखना है? मैंने अपनी एक्स‌ से यह कह कर ब्रेकअप किया था कि ‘I can’t understand your mixed signals’. आपसे ज्यादा आत्म केंद्रित इंसान इस दुनिया में कोई नहीं होगा। अब मेरी भूतपूर्व प्रेमिका ही मुझे आपकी वीडियो के लिंक भेज कर सवाल उठा रही है- “अब बोल.. अब बोल ना ‘अपशब्द’?”

क्या मुँह दिखाऊँ अब मैं उसे? मुझे तो तुम ने कहीं का नहीं छोड़ा ना रवीश? मुझे तो जाने दो तुम ने इस देश की पत्रकारिता को कहीं का नहीं छोड़ा है। सेल्फ ऑब्सेशन के घोड़े पर सवार रवीश तुम्हें ऐसा लगता है कि देश के सभी मीडिया हाउस और सभी पत्रकार वज्र देहाती हैं और केवल बासी छाछ मथ के मक्खन निकालना जानते हैं। पत्रकारिता की असली मोज़रैला चीज़ तो तुम ही अपनी काया में हर छिद्र से उत्पन्न कर रहे हो। 

7 वर्ष बीत चुके हैं रवीश , आखिर कब तक यह साउथ दिल्ली की शनाया का ‘मैं इतनी सुंदर हूँ, मैं क्या करूँ’ वाला एटीट्यूड लेकर चलते रहेंगे? क्या कभी खुद को शीशे में देखकर तुम्हारी हंसी नहीं निकल जाती है?

इन्होंने अपनी वीडियो में यह भी कहा कि हैथवे द्वारा उनके चैनल को पैक से हटाने का कोई बिजनेस संबंधी कारण दिया गया है जो कि राजाजी के अनुसार पूरी तरह गलत है। कब तक ये तुच्छ कारण देकर अपनी अक्षमता पर पर्दा डालते रहोगे। इन बातों से तुम्हारे क्विंट और वायर के चेले-चपाटे ही त्रिशंकु बन पाते होंगे, जनता को सब समझ आता है।

वैसे तो तुम सब जानते हो परंतु फिर भी अपने कानों में सांडे का तेल डालकर यह कड़वा सत्य सुन लो कि दुनिया पैसे से ही चलती है। चाहे वह अंबानी अडानी के बड़े-बड़े कारखाने हों, निजी केबल टीवी हो, या मीडिया हाउस। तुम्हारा न्यू दिल्ली टेलीविजन भी पैसों और विज्ञापन पर ही चलता है और अगर ऐसा नहीं मानते तो दिन रात ‘भगवा आतंकवाद’ चिल्लाने वाले रवीश, सबसे पहले अपने चैनल पर से एक भगवाधारी योग गुरु की कंपनी के विज्ञापन हटवा कर दिखाओ।

पाकिस्तानी जरनैलों की तरह यह थूक बिलोना बंद करो कि कोई संघ, आईटी सेल, पूरी भाजपा, देश का बहुसंख्यक समुदाय सब मिलके तुम्हारे विरुद्ध कोई गुप्त गोष्ठियों करते हैं और तुम्हारे प्राइम टाइम की टीआरपी गिराने के लिए अपने सारे कामकाज छोड़कर तुम्हारी बुलन्द आवाज़ को दबाने के लिए तुम्हारे विरुद्ध सुबह शाम कोई साजिशें रची जाती हैं।

वैसे रवीश के लम्पट फैन समूह यह मानते हैं कि मोदी जी ९ बजे रात को हर प्राइम टाइम दर्शक की छत पर अपना होलोग्राम भेज देते हैं जो कि कैंची से तार काट देता है। वैसे विज्ञान ने तरक्की तो कर ली है, लेकिन इतनी की है कि नहीं, इस पर मुझे निजी तौर पर संदेह है।

इतने खाली तुम्हारे चाचू जान की यूनिवर्सिटी के गंगा ढाबे पर उधारी के चाय और मठ्ठी खाते 40-45 वर्ष के छात्र हो सकते हैं रवीश, संघ और भाजपा वालों के पास तो शायद इतना समय नहीं होता होगा।

थोड़ा आत्ममंथन करो। जिस कंपनी का स्टीकर लैपटॉप पर चिपका कर रात 9:00 बजे प्राइम टाइम करते हो उसी के प्रमुख की सलाह मानकर सुबह शाम साँसे ही अंदर बाहर कर लिया करो।

शायद तुम्हें यह समझने का समय मिल जाए तुम्हारी लोकप्रियता समाप्त हो चुकी है। अब जनता तुम्हारी 7 वर्षों से चली आ रही रटी रटाई स्क्रिप्ट सुनना नहीं चाहते। वे समझ चुके हैं कि तुम कोई निष्पक्ष पत्रकार नहीं हो क्योंकि अगर ऐसा होता तो तुमने जैसे अपने गले की नाड़ियों को फाड़ते हुए सर्दियों में रेवड़ी और गजक बेचने आने वालों से भी तेज चिल्ला-चिल्ला कर रफ़ाल नाम के 1 मनगढ़ंत घोटाले का प्रचार किया था।

उसी जोश के साथ तुम अपने मालिक द्वारा दिए गए 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा के टैक्स घोटाले पर भी बात करते। पर नहीं, तुम ऐसा नहीं करोगे क्योंकि इस मुद्दे पर बात करते समय तुम्हारे होंठ आपस में उसी तरह चिपक जाएँगे, जिस तरह पतंजलि के शहद पर मधुमक्खियाँ।

यू सी व्हाट आई डिड देयर हाँ!

मैंने सुना है सुबह 7:00 बजे उठकर दिनभर हजारों शब्द लिखते हो और तब जाकर रात 9:00 बजे प्राइम टाइम कर पाते हो। च च च… इतना सब करने के बाद भी दर्शक नहीं जुटा पा रहे हो? हैथवे के नाम का प्रोपेगेंडा करना पड़ रहा है। 

एक काम करो यूट्यूब पर जाओ और सर्च बॉक्स में DoPolitics लिखकर चैनल को सब्सक्राइब कर घंटी का आइकन दबा देना। हर सप्ताहांत पर ‘आप की बात’ नाम का शो आता है। देख लेना और लिखाई पसंद आए तो अपने वामी कैडर के किटी पार्टी व्हाट्सऐप ग्रुप में शेयर भी कर देना। 

वीडियो हमारे भी बहुत डिमॉनेटाइज होते हैं राजा जी, लेकिन हम क्राय बेबी बनकर टेसू नहीं बहाते, अगली और बेहतर वीडियो बनाने में लग जाते हैं। न ही हम प्रपंच करके अपने दर्शकों से पैसा लेते हैं….. सीधे-सीधे डोनेशन लिंक डिस्क्रिप्शन में डाल देते हैं।



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