बंगाल: जाली नोट छापने वाली फैक्ट्री का मालिक सलीम गैंग सहित गिरफ्तार, ISI का हाथ होने की संभावना

26 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
कोलकाता से जाली नोट छापने वाला गिरोह गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में सौ रुपए के नकली नोट छापने की एक फैक्ट्री पर पुलिस ने छापा मार कर बड़ी संख्या में नकली नोट बरामद किए हैं। नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़ करने के साथ ही पुलिस ने नकली नोट छापने के तीन आरोपित- सलीम खान,फैजान अहमद और मजीद हुसैन को भी गिरफ्तार किया है। आरोपितों के तार पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से जुड़े होने का संदेह है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले कोलकाता पुलिस को शहर में बड़ी सँख्या में 100 रुपए के नोट खपाने की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर जाँच में पूर्वी कोलकाता से बड़ी संख्या में एक सौ रुपए के नकली नोट बरामद किए गए थे।

नकली नोटों के उस स्रोत के आधार पर, बेनियापुकुर पुलिस स्टेशन पुलिस और कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को नकली नोट छापने वाले एक बड़े गिरोह का सुराग मिला था।

पुलिस के मुताबिक, कुछ दिन पहले बेनियापुकुर थाने के अधिकारियों को सीमा शुल्क विभाग से सूचना मिली थी कि पूर्वी कोलकाता के बेनियापुकुर, तपसिया, तिलजला और कोरिया में अलग-अलग जगहों पर 100 रुपए के नकली नोट बिखरे हुए हैं। ऐसे ही नकली नोटों के कुछ सैंपल पुलिस के पास भी आए।

नोटों के सैम्पल बरामद होने के बाद पुलिस ने इसके पीछे छुपे अपराधियों तक पहुँचने के लिए अपने मुखबिरों को सक्रिय कर दिया। एक मुखबिर से सटीक सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बेनियापुकुर में ही समीर खान नाम के व्यक्ति के घर पर छापा। इस गुप्त घर की तलाशी लेने पर पुलिस को वहाँ से सौ रुपए के कुल 436 नकली नोट मिले।

समीर से पूछताछ के बाद पुलिस ने तपसिया इलाके में एक घर की तलाशी ली और मोहम्मद तैजान अहमद को गिरफ्तार किया। तैजान के घर से पुलिस ने कंप्यूटर, आधुनिक स्कैनर और उच्च गुणवत्ता वाले प्रिंटर बरामद किए गए। उसका कंप्यूटर खोलने पर उसमें 100 रुपए के नए नोट के कागज और दोनों तरफ का प्रिंट आउट मिला।

नकली नोटों के लिए कहाँ से आया असली कागज़?

इस मामले में सबसे दिलचस्प बात ये है कि नकली नोट घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे थे, लेकिन इनमें इस्तेमाल किया गया कागज मूल नोट का ही कागज था, जिसे रिजर्व बैंक नोट छापने में इस्तेमाल करता है। तैजान अहमद के घर से पुलिस को इचार बाई चार साइज के कागज का बंडल मिला था, इसी कागज़ को काटकर नकली नोट बनाए जा रहे थे।

आम आदमी के लिए इस नोट का कागज इकट्ठा करना लगभग नामुमकिन है इसलिए पुलिस को यकीन है कि नकली नोटों की इस साजिश के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आमतौर पर पैसा छापने का कागज विदेशों से आता है।

केवल केंद्र सरकार ही उस कागज की खरीद कर सकती है। पाकिस्तान की सरकार भी उसी जगह से नोट छापने के लिए कागज खरीदती है, जहाँ से भारत सरकार मँगवाती है। नतीजतन, पुलिस इस संभावना से भी इंकार नहीं कर रही है कि इन नकली नोटों का कागज़ पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई की मदद से गिरोह के हाथ में आया हो।

गिरोह के तार ISI से जुड़े होने की संभावना पर जाँच STF को सौंपी

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपितों को सियालदह कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ जज ने उन्हें पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया। गिरोह के तार आईएसआई से जुड़ने की संभावना के बाद मामले की जाँच एसटीएफ को सौंप दी गई। इसके बाद मलालबाजार एसटीएफ ने सियालदह कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दोनों आरोपितों को बेनियापुकुर थाने से अपनी हिरासत में ले लिया।

एसटीएफ ने तुंरन्त ही इस बात की जाँच शुरू कर दी कि आरोपितों के हाथ नकली नोट का असली कागज कैसे आया और इसे किन जरियों से खपाया गया। एसटीएफ ने दोनों आरोपितों से पूछताछ के बाद मध्यरात्रि में तपसिया रोड पर छापेमारी कर रिपन स्ट्रीट निवासी एक अन्य आरोपित माजिद हुसैन उर्फ ​​इमरान उर्फ ​​राजा को गिरफ्तार कर लिया।

माजिद हुसैन के पास से 500 रुपए के दो जाली नोट बरामद किए गए। बुधवार को जब तीनों को बंशाल कोर्ट ले जाया गया तो जज ने उन्हें 31 अगस्त तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया। पुलिस ने कहा कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस गिरोह ने 100 रुपए के जाली नोटों की तरह ही , 500 रुपए के जाली नोट भी छापे हैं।



सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं:

ताज़ा समाचार