चुनिंदा घटनाओं में मानवाधिकारों का हनन देखने वालों से रहें सावधान: PM मोदी

12 अक्टूबर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
पीएम मोदी ने कहा कि मानवाधिकारों को राजनीतिक लाभ-हानि की नजर से देखना इन अधिकारों के साथ-साथ लोकतंत्र को भी नुकसान पहुँचाता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 12 अक्टूबर, 2021 को नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (NHRC) के 28वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने विचार प्रकट किए, जिसमें उन्होंने मानवाधिकारों पर ‘सिलेक्टिव आउटरेज’ को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों को राजनीतिक चश्मे से देखना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। 

गौरतलब है कि इस आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम‌ 1993 के तहत 12 अक्टूबर, 1993 को मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण के लिए किया गया था।

बता दें कि NHRC मानवाधिकारों के उल्लंघन का संज्ञान लेता है। इस पर जाँच और सार्वजनिक अधिकारियों से पीड़ितों को मुआवजे की सिफारिश भी करता है।


प्रधानमंत्री मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा:

“कुछ लोग इन दिनों मानवाधिकारों को अपने दृष्टिकोण से चित्रित करते हैं। वे कुछ ही मामलों में मानवाधिकारों के उल्लंघन को देखते हैं, लेकिन इसी तरह के अन्य मामलों में नहीं। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा।”

राजनीतिक लाभ के लिए मानवाधिकारों का इस्तेमाल 

प्रधानमंत्री ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण को लेकर आगे कहा:

“मानवाधिकारों को राजनीतिक लाभ और हानि की दृष्टि से देखना इन अधिकारों के साथ-साथ लोकतंत्र को भी नुकसान पहुँचाता है। ऐसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए हानिकारक है और देश की छवि खराब करता है। हमें ऐसी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।”


प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दशकों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब दुनिया गुमराह हुई और अपना रास्ता भटक गई, लेकिन भारत हमेशा मानवाधिकारों के लिए प्रतिबद्ध रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विषय में भी बात की और कहा: 

“हमने सदियों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और एक देश और समाज के रूप में, हमेशा अन्याय और अत्याचार का विरोध किया।”

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों की शौचालय, रसोई गैस, बिजली और घर जैसी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए एनडीए सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों के विषय में बात की। पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए ‘तीन तलाक’ के विरुद्ध कानून के बारे में भी बात की। 

इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और एनएचआरसी के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने भी इस कार्यक्रम में अपने विचार प्रस्तुत किए।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी सभा को संबोधित किया और ट्रांसजेंडर्स के मानवाधिकारों के विषय में बात करते हुए कहा कि यह पहली बार है कि ट्रांसजेंडरों को संविधान के तहत परिकल्पित अधिकार मिल रहे हैं।

‘राजनीतिक हिंसा की आलोचना ज़रूरी’

एनएचआरसी के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने कश्मीर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए देश के गृहमंत्री अमित शाह को श्रेय दिया और कहा कि उनकी वजह से ही प्रदेश में एक नए युग की शुरुआत हो पाई है।

इसके आगे जस्टिस मिश्रा ने मानवाधिकारों की चयनात्मक परिभाषा के बारे में भी बात की और कहा कि मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवादियों और आतंकवाद का महिमामंडन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मानवाधिकार के रक्षक राजनीतिक हिंसा की आलोचना नहीं करते तो उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।



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