मुस्लिमों को नहीं दे सकते पिछड़े वर्ग के विशेषाधिकार: SC में सच्चर कमेटी के खिलाफ याचिका दर्ज

29 जुलाई, 2021
सच्चर कमेटी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका

कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 2005 में गठित की गई सच्चर कमेटी (Sachar Committee) के विरोध में एक याचिका दर्ज की गई है। इस कमेटी की वैधता को लेकर ‘सनातन वैदिक धर्म’ के एक हिंदूवादी समूह के 6 लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में यह अर्ज़ी लगाई है।

सच्चर कमेटी

सच्चर कमेटी (Sachar Committee) 7 लोगों की एक उच्च स्तरीय कमेटी थी, जिसे 2005 में गठित किया गया था। इसका नेतृत्व दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व चीफ जस्टिस राजेंद्र सच्चर द्वारा किया गया था।

इस कमेटी को भारत में मुस्लिमों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति की जाँच के लिए बनाया गया था। इसमें मुस्लिम समुदाय को अल्पसंख्यक होने के कारण पिछड़ा मानते हुए कई कल्याणकारी योजनाएँ प्रदान करने की बात कही गई थी।

बता दें कि इस कमेटी का गठन बिना किसी कैबिनेट के मंत्री की सलाह के किया गया था। यह पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के कार्यालय द्वारा लिया गया निर्णय था।

सनातन वैदिक धर्म की याचिका

सनातन वैदिक धर्म नामक हिंदूवादी संस्था के 6 लोगों द्वारा इस कमेटी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन इस मामले में याचिका कर्ताओं का पक्ष प्रस्तुत करेंगे।


याचिका में पहला तर्क यही दिया गया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस कमेटी को केवल अपने आदेश पर बनाने का निर्णय लिया था क्योंकि वर्ष 2005 में जारी नोटिफिकेशन में कहीं भी इसे कैबिनेट का निर्णय नहीं कहा गया है।

याचिका में यह तर्क दिया गया कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के हिसाब से किसी भी समुदाय के साथ अलग से व्यवहार नहीं किया जा सकता है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थितियों के जाँच के लिए एक आयोग नियुक्ति करने की शक्ति केवल अनुच्छेद 340 के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास है।

याचिका के अनुसार, चूँकि समस्त मुस्लिम समुदाय किसी तरह शैक्षिक व सामाजिक स्तर पर पिछड़ा नहीं साबित किया जा सकता है, तो मुस्लिम समुदाय को ऐसे किसी प्रकार के विशेषाधिकार या लाभ नहीं दिए जा सकते हैं, जो पिछड़े वर्गों को दिए जाते हैं।

याचिका में आगे कहा गया:

“मुस्लिम समुदाय किसी विशेष व्यवहार का हकदार नहीं है, क्योंकि वह लंबे समय तक शासक थे और यहाँ तक कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी उन्होंने सत्ता का आनंद लिया। जबकि हिंदू समुदाय के एससी/एसटी वर्ग और ओबीसी को दबाया गया, प्रताड़ित किया गया, कत्लेआम किया गया और लालच देकर एवं बलपूर्वक उनका पंथ परिवर्तन तक कराया गया।”



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