आतंकियों से संबंध के आरोप में सैयद अली गिलानी का पोता सरकारी नौकरी से बर्खास्त

18 अक्टूबर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
सेवा से बर्खास्त किया गया अलगाववादी नेता गिलानी का पोता

भारत सरकार ने शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) की शाम को जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा के लिए पूर्व हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोते को अपनी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया। बता दें कि गिलानी का यह पोता अनीस-उल-इस्लाम, शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में शोध अधिकारी का पद संभाले हुए था।

शनिवार को सरकारी नोटिस के माध्यम से यह सूचना साझा की गई जिसमें कहा गया:

“उपराज्यपाल मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद और अब तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर मानते हैं कि अनीस-उल-इस्लाम, शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में अनुसंधान अधिकारी की गतिविधियाँ उन्हें बर्खास्त करने के संकेत देती हैं।”

आगे यह भी कहा गया कि एलजी भारत के संविधान के अनुच्छेद 311 के खंड (2) के प्रावधान के तहत संतुष्ट हैं कि यह मामला राज्य सुरक्षा का है और इस मामले में अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता नहीं है। इसके उपरान्त एलजी ने अनीस-उल-इस्लाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर देने का आदेश दिया। 


सरकार ने इस मामले में कोई विशेष स्पष्टीकरण नहीं दिया है, या चार्जशीट पेश नहीं की है, केवल आरोपित को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश सुनाया गया है। बता दें कि अनीस-उल-इस्लाम को वर्ष 2016 में तत्कालीन सीएम महबूबा मुफ्ती के कार्यकाल में एसकेआईसीसी में अनुसंधान अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। 

20 अन्य कर्मचारियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई 

घाटी से धारा 370 और 35a हटने के बाद से ही सरकार प्रदेश की सुरक्षा को लेकर काफी सख्त है और अलगाववादियों और आतंकियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी सिलसिले में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सरकार की तरफ से कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

इस साल मई में, सरकार ने उन कर्मचारियों के मामलों की पहचान करने और उनकी जाँच करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया था, जो ऐसे कृत्यों में शामिल हैं जो देश की सुरक्षा या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। 

सरकार अब तक राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा होने के आरोप में 20 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर चुकी है। सितंबर माह में, कर्मचारियों को सूचित करते हुए एक आदेश जारी किया था।

इसमें कहा गया था कि सभी को भारत और उसके संविधान के प्रति पूर्ण अखंडता, ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखने की आवश्यकता है और ऐसी किसी गतिविधि में लिप्त नहीं होना होगा जो एक सरकारी कर्मचारी के लिए अशोभनीय हो।

आदेश में यह भी कहा गया कि उन सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की जाएगी जो रिश्तेदारों, आवासीय स्थान साझा करने वाले व्यक्तियों या किसी भी विदेशी सरकार, समूहों, विदेशी नागरिकों से जुड़े हैं। जो कि भारत के राष्ट्रीय और सुरक्षा हितों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खतरा हैं।



सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं:

ताज़ा समाचार