तालिबान का रवैया मुस्लिमों जैसा नहीं: तुर्क राष्ट्रपति एर्दोआँ ने की 'भाईचारा' निभाने की अपील

20 जुलाई, 2021
फिर जाएगा इस्लामी उम्माह का नेता एर्दोआँ

इस्लामी जगत का ख़लीफ़ा बनने की चाह रखने वाले तुर्की और खुद को सच्चे इस्लाम का अनुयायी बताने वाले तालिबान (Taliban) के बीच टकराव और जबानी जंग बढ़ती जा रही है।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआँ (Recep Tayyip Erdogan) ने तालिबान की आलोचना करते हुए कहा है कि ‘तालिबान का रवैया सही नहीं है, खासकर मुस्लिमों जैसा तो बिल्कुल भी नहीं है’।

तुर्की के राष्ट्रपति ने यह बात सोमवार (19 जुलाई, 2021) को इस्तांबुल में पत्रकारों से बात करते हुए कही। एर्दोआँ ने कहा “हमारी नज़र में, तालिबान का रवैया वैसा नहीं है जैसा एक मुस्लिम का दूसरे मुस्लिम के प्रति होना चाहिए।”

तुर्क राष्ट्रपति ने कहा कि तालिबान को अपने ही भाइयों की ज़मीन से कब्ज़ा छोड़ देना चाहिए। उन्होंने तालिबान से अपील की कि वो दुनिया को जल्द से जल्द दिखाए कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल हो चुकी है।

इससे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान में तुर्क सौनिकों की मौजूदगी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि हम अपने देश में किसी भी विदेशी सेना की किसी भी रूप में मौजूदगी को कब्ज़ा मानते हैं। बता दें कि अफ़ग़ानिस्तान में तुर्की के भी सैकड़ों सैनिक मौजूद हैं। हालाँकि, एक तुर्क अधिकारी का दावा है कि वो जंग में लड़ने वाले सैनिक नहीं हैं।

दरअसल तालिबान और तुर्की के बीच बढ़ती खटास की वजह काबुल एयरपोर्ट है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के निकलने के बाद तुर्की इस एयरपोर्ट पर कब्जा और संचालन करना चाहता है, मगर तालिबान ने इसकी अनुमति देने से कड़े शब्दों में मना कर दिया है।

तुर्की ने तालिबान के साथ काबुल में एयरपोर्ट के बारे में बात करने के बारे की पेशकश की थी, जिसे लेकर दोनों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। तालिबान के एक प्रवक्ता ने पिछले सप्ताह एक बयान में तुर्की की काबुल एयरपोर्ट का संचालन करने की पेशकश को ‘घृणित’ बताया था।

तुर्की काफी वक्त से काबुल एयरपोर्ट पर पूर्ण कब्जे के प्रयास में है और एयरपोर्ट के संचालन के लिए वह अमरिकी रक्षा अधिकारियों से लगातार बात करता रहा है। जून में नाटो शिखर सम्मेलन में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ अपनी पहली मुलाक़ात में भी इस विषय को उठाया था।

अफ़ग़ानिस्तान में अशांति असहनीय: ईरान

तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने भी सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर चिंता जताई।

सोमवार को तेहरान में पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान से पलायन करने वाले शरणार्थियों की ईरान की ओर आने वाली नई लहर तुर्की के लिए चिंता की बात है।

उन्होंने कहा था कि शरणार्थी घुसपैठियों को रोकने के लिए बहुत ही बारीकी से सीमा पर नज़र रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अशांति, ईरान के लिए असहनीय है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संचार माध्यमों की रिपोर्टों के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में छिड़ी लड़ाई के कारण लगभग 2,70, 000 हज़ार अफ़ग़ान बेघर हो गए हैं।

कई इलाके तालिबान के कब्ज़े से मुक्त

इस बीच सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ऐलान किया है कि गत 24 घंटों के दौरान कई इलाकों को तालिबान के कब्जे छुड़ा लिया गया है।

मंत्रालय द्वारा दावा किया गया कि नंगरहार, ग़ज़्नी, कंधार, सरपुल, फारियाब, बल्ख, हेलमंद, तखार और कुन्दूज़ में तालिबान के 233 आतंकी मारे गये जबकि 88 घायल हो गए।

इसी बीच अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में स्थित 17 देशों के राजनयिकों ने तालिबान से माँग की है कि वह ईद की छुट्टी के दिनों में हथियार जमीन पर रख दें और दुनिया को शांति प्रक्रिया की बहाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाए।



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