गाय, लेनिन, मार्क्स का मजाक नहीं बना सकते, तमिल देश में पेरियार ही 'सबसे पवित्र गाय' है: मद्रास HC

21 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि पूरे देश में राष्ट्रीय सुरक्षा 'परम पवित्र गाय' होती है

मद्रास उच्च न्यायालय ने भाकपा (माले) [CPI (ML)] के एक पदाधिकारी के खिलाफ ‘आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट’ को लेकर दर्ज एफआईआर खारिज कर दी है। राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को ‘मजाकिया’ पोस्ट को ‘राज्य के खिलाफ युद्ध’ माना था।

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने 62 वर्षीय आरोपित के खिलाफ ‘राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करने’ के लिए दर्ज मामले को ‘बेतुका और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया। दरअसल भाकपा (माले) के एक पदाधिकारी मथिवनन (62) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में मजाक में लिखा था कि वह ‘शूटिंग अभ्यास के लिए सिरुमलाई की यात्रा’ कर रहे हैं।

वाडीपट्टी पुलिस ने इस पोस्ट को संज्ञान लेते हुए यह सोचकर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया कि याचिकाकर्ता राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि, मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने फेसबुक पोस्ट को ‘मजाक’ मानते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया।

याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने कहा, “मामले के तथ्य यह था कि मथिवानन 16 सितंबर, 2021 को अपनी बेटी और दामाद के साथ सिरुमलाई पहाड़ियों की यात्रा पर गए थे। वहाँ उन्होंने तस्वीरें लीं और उन्हें एक तमिल कैप्शन ‘शूटिंग अभ्यास के लिए सिरुमलाई की यात्रा’ के साथ पोस्ट कर दीं।

वाडीपट्टी पुलिस को यह कैप्शन अच्छा नहीं लिखा और उसने उनके खिलाफ धारा 120 बी (आपराधिक साजिश के लिए सजा), 122 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करना) , 505 (1) ( b) (जनता में भय पैदा करने के इरादे से सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान) और आईपीसी के 507 (एक गुमनाम संचार द्वारा आपराधिक धमकी) ले तहत मामला दर्ज किया।

मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर रिमांड के लिए पेश किया था। न्यायाधीश ने पुलिस को याचिकाकर्ता की रिमांड देने से इंकार करते हुए कहा, “याचिकाकर्ता के पास से कोई हथियार या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। याचिकाकर्ता का न तो युद्ध करने का इरादा था और न ही उसने इसकी तैयारी के लिए कोई कदम उठाया था।”

आगे अदालत ने कहा, “राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए कई चरणों में तैयारी करनी पड़ती है। गिरोह की लामबंदी, आदमी जुटाना, हथियार, गोल-बारूद और रसद इकट्ठा करना राज्य के खिलाफ युद्ध की निशानी मानी जा सकती है जबकि याचिकाकर्ता ने सिर्फ हास्य करने के लिए पोस्ट की थी।”

अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता के फेसबुक पेज पर पोस्ट करने से किसी व्यक्ति को राज्य के खिलाफ या सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध करने के लिए प्रेरित नहीं किया जा सकता था।”

न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने कहा कि पोस्ट में कोई गुप्त संदेश नहीं था, याचिकाकर्ता की पहचान स्पष्ट थी और तस्वीरों में कोई हथियार नहीं देखा गया न ही उसके पास से बरामद नहीं किया गया।”

मज़ाक करने और मज़ाक उड़ाने में फर्क

याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने ‘हँसने के कर्तव्य’ और ‘मजाकिया होने के अधिकार’ के बारे में कुछ दिलचस्प टिपण्णी भी कीं।

भाकपा-माले को लेकर अपनी व्यंगात्मक टिप्पणी में कोर्ट ने कहा,

“भाकपा-माले एक जमीनी संगठन है जो अब चुनाव लड़ता है। कागजी योद्धाओं को भी यह कल्पना करने का अधिकार है कि वे स्वदेशी चे ग्वेरा हैं और क्रांतिकारी हैं, चाहे वास्तविक हों या नकली। याचिकाकर्ता ने मजाकिया बनने की कोशिश की जो शायद यह हास्य का उनका पहला प्रयास था।”

अदालत ने कहा कि किस पर हँसा जाना चाहिए, ये एक गम्भीर प्रश्न है क्योंकि मजाक करने और मजाक उड़ाने में फर्क है। अदालत ने कहा कि ‘मजाकिया होना’ और ‘दूसरे का मज़ाक उड़ाना’ दो अलग चीज हैं।

न्यायालय ने आगे यह भी कहा कि भारत में क्षेत्रीय विविधता की पृष्ठभूमि में यह प्रश्न प्रासंगिक इसलिए हो जाता है क्योंकि हमारे पास वाराणसी से वाडीपट्टी तक पवित्र गायें चरती हैं। कोई उनका मजाक उड़ाने की हिम्मत नहीं करता। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पवित्र गाय होती है।

अदालत ने कहा, “हालाँकि पवित्र गायों की एक भी सूची नहीं है। गाय भले ही बहुत कम और दुर्बल हो, एक योगी के इलाके में वो पवित्र ही होगी, वहाँ उसका मजाक नहीं बनाया जा सकता। पूरे भारत में गाय परम पवित्र जीव है।”

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने कहा, “मेरे अपने तमिल देश में आकर, हर समय आइकॉनोक्लास्ट (रूढ़ि विरोधी) ‘पेरियार’ ईवी रामासामी एक अति-पवित्र गाय हैं।”

अदालत ने पश्चिम बंगाल में टैगोर, तमिल देश में पेरियार, आज के केरल में, मार्क्स और लेनिन तथा महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी और वीर सावरकर को जैसे सम्मानित पुरुषों का उदाहरण देते हुए मजाकिया होने की ‘सीमा रेखा’ का भी जिक्र किया, क्योंकि उन्हे अलग अलग क्षेत्रों में सम्मान प्राप्त है।

सीपीआई (एमएल) नेता के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए न्यायाधीश ने फैसला सुनाया और कहा, “लगाई गई प्राथमिकी का पंजीकरण ही बेतुका और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसे रद्द किया जाता है।”



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