टिकरी बॉर्डर पर बंगाली युवती का बलात्कारी 'अन्नदाता' निकला AAP नेता, गिरफ्तार

10 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
टीकरी बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में बंगाल की आंदोलनकारी युवती की मौत हो गई थी (प्रतीकात्मक हीटर)

टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन की आड़ में पश्चिम बंगाल की युवती से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपितों में से एक अनिल मलिक को हरियाणा पुलिस की स्पेशल टीम ने भिवानी से गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तार अनिल मलिक आम आदमी पार्टी का नेता है, उस पर 25,000 रुपए का इनाम घोषित था। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से जुड़ा अनिल मलिक सामूहिक बलात्कार का मुख्य आरोपित है।

कथित किसानों का समर्थन करने धरने पर आई पश्चिम बंगाल की युवती से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में दो महिलाओं समेत 6 पर नामजद एफआईआर दर्ज हुई थी।

30 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की आंदोलनकारी इस 25 वर्षीय युवती की दुष्कर्म के बाद कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो गई। 6 आरोपितों में से तीन की गिरफ्तारी पर 25-25 हज़ार रुपए का ईनाम रखा गया था।

मुख्य आरोपित माना जा रहा अनिल मलिक एफआइआर दर्ज होने से कई दिन पहले ही भूमिगत हो गया था। मामले में अति वांछित आरोपित अनिल मलिक को एसआईटी टीम ने भिवानी के एक ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया है, जहाँ वो छुपा हुआ था।

बुधवार को भिवानी पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने जानकारी देते हुए बताया, “टिकरी बॉर्डर पर बंगाली युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 25,000 के इनामी अतिवांछित आरोपित झोझूकलाँ निवासी अनिल मालिक को गुप्त सूचना ले आधार पर डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व में बनी एसआईटी टीम ने दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया है।”

मृतका को बंगाल से ला कर किया गया था आंदोलन में शामिल

4 आरोपितों सहित किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गत 1 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के हुगली में एक सार्वजनिक बैठक की थी। उस समय पीड़िता, जो कि एक कलाकार और डिजाइनर थी, की आरोपितों से मुलाकात हुई। आरोपितों ने भाजपा के विरोध में पीड़ित युवती को बंगाल से लाकर किसान आंदोलन में शामिल कराया गया।

बाद में टिकरी बॉर्डर पर किसान सोशल आर्मी के नाम से एक तंबू बनाया गया था जहाँ युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात अंजाम दी गई। किसान नेता इस घटना को छुपाया रहे। बाद में युवती को कोरोना हो गया और 30 अप्रैल को उसकी अस्पताल में मृत्यु हो गई। युवती की मृत्यु के बाद पिता को की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ था।

2 ‘AAP’ नेताओं सहित 6 पर दर्ज है मुकदमा

30 अप्रैल को युवती की मृत्यु के बाद युवती के पिता ने बहादुरगढ़ सिटी थाने में 06 लोगों अनिल मलिक, अनूप सिंह, अंकुश सांगवान और जगदीश बराड़ के साथ-साथ दो अन्य महिलाओं- योगिता सुहाग एवं कविता आर्य के विरुद्ध अपहरण, ब्लैकमेलिंग तथा सामूहिक दुष्कर्म के मामले दर्ज कराए गए हैं।

अनिल मलिक और अनूप सिंह आम आदमी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। आम आदमी पार्टी का नेता अनिल मलिक इस जघन्य सामूहिक दुष्कर्म कांड का मुख्य आरोपित है। पीड़िता द्वारा अपने साथ हुई इस अमानवीय घटना का ज़िक्र करने पर दोनों आरोपित महिलाओं ने उसे किसी से कुछ ना कहने को धमकाया था।

आरोपितों पर आईपीसी की धारा 365, 342, 376-डी, 506, 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन सभी ने किसान सोशल आर्मी के बैनर तले टिकरी सीमा पर टेंट स्थापित किया था, जहाँ युवती के साथ कई लोगों ने बलात्कार किया। एफ़आईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए किसान सोशल आर्मी का तंबू तोड़ दिया था।

किसान नेताओं ने आरोपितों को दी थी छुपने की सलाह

दिलचस्प बात यह थी कि जब तक युवती के पिता ने आगे आकर एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई थी तब तक किसान नेता आरोपितों को बचाने की पूरी कोशिश करते रहे। राकेश टिकैत से लेकर योगेन्द्र यादव तक सभी बड़े नेताओं को इस घृणित मामले की जानकारी थी।

किसान आंदोलन को बदनामी से बचाने के लिए बड़े किसान नेताओं ने इस मामले को पुलिस तक ले जाने से रोके रखा और धरना स्थल पर ही कमेटी बनाकर मामले को सुलझाने की कोशिश करते रहे। कई किसान नेताओं ने युवती के पिता से मिलकर उन पर भी दबाव डालने की कोशिश की थी।

सामूहिक बलात्कार के एक आरोपित अनूप चानौत ने मुकदमा दर्ज होने के बाद एक वीडियो संदेश जारी करते हुए खुद को निर्दोष बताया था। वीडियो में अनूप चानौत खुद ही यह बात स्वीकार कर रहा है कि जब सामूहिक बलात्कार मामले में कमेटी की बैठक हुई थी तो किसान नेताओं ने उससे कुछ दिनों के लिए छुपने के लिए कहा था

पूछताछ की रफ्तार पड़ी ‘सुस्त’

यूपी से सामूहिक बलात्कार की जाँच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने किसान नेताओं से पूछताछ करना पूरी तरह बंद कर दिया है। कई दिनों से किसी किसान नेता या अन्य किसी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है और ना ही किसी को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इस मामले में जाँच टीम ने अब तक दो महिला आरोपितों समेत कुल 25 लोगों से पूछताछ की है।

किसान आंदोलन की आड़ में हुई हत्या, बलात्कार और लूट

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान ना सिर्फ एक अराजक आंदोलन का चेहरा बने रहे, बल्कि यह धरनास्थल अब कई आपराधिक घटनाओं का गढ़ भी बन चुके हैं। किसान नेताओं को हर अपराध की जानकारी होती है मगर वह इस पर चुप्पी साधे रहते हैं ताकि अराजक आंदोलन को कोई नुकसान ना हो।

किसान आंदोलन की आड़ में धरना स्थल के आसपास लूट की वारदातें, साजिशन हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। अराजकता का चेहरा बन चुका किसान आंदोलन अब धीरे-धीरे अपराधियों के छुपने की जगह और अपराधों का उद्गम स्थल भी बनता जा रहा है।





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