तुर्की ने नागरिकों को दिए शाकाहारी बनने के निर्देश, रोज के माँस-टमाटर बढ़ती महँगाई पर पड़ रहे भारी

27 नवम्बर, 2021
खलीफा बनने के सपने देखने वाले तुर्की राष्ट्रपति नहीं भर पा रहे अपनी ही जनता का पेट

कुछ समय पहले तक स्वयं को विश्वभर के मुस्लिम समुदाय का नेता बताने वाले तुर्की राष्ट्रपति और स्वयं को खिलाफत स्थापना का गढ़ मानने वाले देश तुर्की की हालत इन दिनों बेहद नाज़ुक है। देश में चल रहे भीषण आर्थिक संकट को लेकर तुर्की द्वारा अपने नागरिकों से माँस न खाने और शाकाहारी बनने जैसे आग्रह किए जा रहे हैं।

तुर्की सरकार ने अपनी मुद्रा, यानी ‘लीरा’ के पतन और खाद्य कीमतों में भारी वृद्धि को देखते हुए जनता से शाकाहारी भोजन की ओर कदम बढ़ाने और खाद्य पदार्थों की बर्बादी के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने का फैसला किया है।

इस विषय में तुर्की के सांसद ज़ुल्फ़ु डेमिरबास ने कहा:

“लोगों को हर महीने 1-2 किलो माँस खाने के बजाय, आधा किलो खाना चाहिए। हम 2 किलो टमाटर खरीदते हैं और उनमें से आधे कूड़ेदान में चले जाते हैं, इससे बेहतर है कि लोग केवल 2 टमाटर खरीदें।”

बता दें कि सांसद ज़ुल्फ़ु डेमिरबास राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआँ की एकेपी पार्टी से संबंधित हैं और उन्होंने यह बयान तुर्की मुद्रा लीरा की कीमत में भारी गिरावट और देश में बढ़ रहे आर्थिक संकट को देखते हुए दिया है।

हाल के दिनों में तुर्की की मुद्रा में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है और यह अब तक के अपने निम्नतम स्तर पर गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की में इन्फ्लेशन दर अब 20% के करीब है, जिसका अर्थ यह है कि रोजाना की दिनचर्या में काम आने वाली वस्तुओं की कीमतें अब आसमान छू रही हैं, और देश के लोगों के वेतन के मूल्य में गंभीर रूप से गिरावट आई है।

इस सबके बाद भी जब देश की अर्थव्यवस्था ढहने की कगार पर है, राष्ट्रपति एर्दोआँ अपने नए तुर्की यानी ओटोमन की महत्वाकांक्षाओं की झूठी शान को बचाने में लगे हैं। वे इसके लिए देश में नए हथियारों के सौदों के खूब विज्ञापन कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सख्ती, ग्रीस भी चिंतित 

ग्रीस के एक टीवी चैनल ‘मेगा टीवी’ ने बताया कि तुर्की के आगामी आर्थिक संकट के विषय में ग्रीस की राजधानी एथेंस में भी खूब चर्चा हो रही हैं क्योंकि यह राज्य तुर्की में किए जाने वाले निर्यात में पहले स्थान पर आता है।

इसके साथ ही लगभग हर इस्लामी मुल्क की भाँति यहाँ भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात पर एर्दोआँ के इरादे साफ़ प्रतीत होते हैं। तुर्की में पिछले दिनों 271 से अधिक सोशल मीडिया खातों को ‘लोगों को घृणा के लिए उकसाने’ के लिए निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि इन खातों से नागरिकों को कीमतों की वृद्धि के विरुद्ध आंदोलन करने और सड़कों पर उतरने के लिए आग्रह किया जा रहा था। 

इससे अधिक गंभीर मामला यह भी है कि तुर्की के पड़ोसी देश ग्रीस को अब यह डर सता रहा है कि एर्दोआँ अपनी घरेलू समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ग्रीस के साथ सीमा पर एक बार फिर उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं। 

बता दें कि कुछ समय पूर्व तक तुर्की राष्ट्रपति एर्दोआँ स्वयं को दुनियाभर में रहने वाले मुस्लिम समुदाय का नेता घोषित करने में लगे थे। कहा जा रहा था कि वे स्वयं को ‘खलीफा’ के रूप में भी देखने लगे थे।



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