खत्म हुआ ट्विटर को मिलने वाला कानूनी संरक्षण: UP पुलिस ने दर्ज की पहली FIR

16 जून, 2021
भारत मे ट्विटर के खिलाफ दंगे भड़काने का पहला मुकदमा दर्ज हुआ है

भारत सरकार द्वारा नए आईटी नियमों के पालन को लेकर ट्विटर को लगातार दी जा रही चेतावनियों को नजरअंदाज करना ट्विटर को भारी पड़ गया है। नए आईटी नियमों का पालन करने में आनाकानी कर रहे ट्विटर पर भारत सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है।

नए नियम न मानने की वजह से ट्विटर को भारत मे मिला कानूनी संरक्षण खत्म होते ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ट्विटर के खिलाफ फेक न्यूज को लेकर आपराधिक धाराओं में पहला केस दर्ज किया है। कानूनी संरक्षण समाप्त होने के बाद ट्विटर पर FIR दर्ज करने वाला उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य है।

क्या था ट्विटर को मिला कानूनी संरक्षण

भारत में ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इम्युनिटी दी गई है अर्थात इन्हें ‘मध्यस्थ’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका तात्पर्य यह है कि अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी या पोस्ट करता है, तो इसके लिए वही व्यक्ति जिम्मेदार होता है, न कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म।


सोशल मीडिया प्लेटफार्म उपलब्ध कराने वाली कम्पनी पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती क्योंकि भारत मे इन कम्पनियों को IT Act की धारा 79 के तहत ‘जिम्मेदारी’ से छूट मिली हुई है।

छूट खत्म होने के बाद अब क्या है ट्विटर की हैसियत

नए आईटी नियम न मानने की वजह से ट्विटर को भारतीय आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिली कानूनी कार्रवाई से मिली छूट खत्म हो गई है। ट्विटर ने अब भारत में इन्टरमीडियरी प्लेटफॉर्म का दर्जा खो दिया है। इस मतलब यह है कि ट्विटर अब भारत मे एक प्रकाशक के रूप में माना जाएगा, मध्यस्थ नहीं।

ट्विटर अब आईटी अधिनियम, साथ ही देश के दंड कानूनों सहित किसी भी कानून के तहत दंड के लिए स्वयं उत्तरदायी होगा। विभिन्न उपयोगकर्ताओं से सामग्री की होस्टिंग करने वाला केवल एक प्लेटफॉर्म माना जाने की बजाय, ट्विटर अब अपने प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित हर पोस्ट और ट्वीट के लिए सीधे ‘संपादक’ के रूप में जिम्मेदार होगा।

अब यदि कोई उपयोगकर्ता ट्विटर पर गैर-कानूनी या भड़काऊ पोस्ट करता है तो इस मामले में ट्विटर को भी आरोपित बनाया जा सकता है।

नए नियम मानने में आनाकानी कर रहा था ट्विटर

ट्विटर को मिला यह कानूनी संरक्षण 26 मई को खत्म हो चुका है क्योंकि नए आईटी नियम 25 मई, 2021 से लागू हो चुके हैं। ट्विटर भारत में अकेला ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बचा था, जिसने सरकार द्वारा बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद के नियमों का पालन करने को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई।

सरकार ने पहले ही ट्विटर को चेतावनी दी थी कि अगर वह नए आईटी नियमों के पालन को लेकर गम्भीर नहीं होता है तो उसे आईटी कानून के तहत ‘दायित्व’ से जो छूट मिली है, वह वापस ले ली जाएगी। इसके बाद ट्विटर को आईटी कानून और अन्य भारतीय दंडात्मक प्रावधानों के तहत होने वाली कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिए गए थे ये निर्देश

25 फरवरी, 2021 को भारत सरकार के इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना मंत्रालय (MeitY) की तरफ से 50 लाख या उससे ज्यादा यूज़र बेस वाले सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को कुछ जरूरी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। इसके लिए इन प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।

आदेश के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को भारत में ऐसे कंप्लायंस अधिकारी और नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे, जिनका कार्यक्षेत्र भारत हो। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा घोषित नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत से अनुपालन अधिकारियों को नियुक्त करना होगा।

इसके अलावा, वेबसाइट और ऐप पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को अपना फिज़िकल कॉन्टैक्ट ऐड्रेस भी देना होगा। शिकायत समाधान, आपत्तिजनक कंटेट की निगरानी, कंप्लायंस रिपोर्ट और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने जैसे नियमों का पालन भी करना होंगे।

कोई आपत्तिजनक सामग्री हटाते समय उपभोक्ता को पहले से जानकरी देनी होगी कि उसमें क्या आपत्तिजनक था। ट्विटर के अलावा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भारत के इन नए आईटी कानूनों का पालन करने पर सहमति जता दी है।

प्रकाशक एवं प्लेटफ़ॉर्म का फर्क

वास्तव में, भारत के सन्दर्भ में देखा जाए तो ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वो प्रकाशक हैं या फिर प्लेटफॉर्म?

यदि ये मंच प्रकाशक हैं तो सारी जिम्मेदारी इन्हें ही लेनी होगी, फिर चाहे वह विवाद किसी टूलकिट के सन्दर्भ में हो, या फिर किसी फर्जी दावे को लेकर! और यदि ये प्लेटफ़ॉर्म हैं, तो ये कौन होते हैं तय करने वाले कि अभिव्यक्ति कैसी होनी चाहिए?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिए गए थे ये निर्देश

25 फरवरी, 2021 को भारत सरकार के इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना मंत्रालय (MeitY) की तरफ से 50 लाख या उससे ज्यादा यूज़र बेस वाले सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को कुछ जरूरी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। इसके लिए इन प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।

आदेश के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को भारत में ऐसे कंप्लायंस अधिकारी और नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे, जिनका कार्यक्षेत्र भारत हो। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा घोषित नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत से अनुपालन अधिकारियों को नियुक्त करना होगा।

इसके अलावा, वेबसाइट और ऐप पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को अपना फिज़िकल कॉन्टैक्ट ऐड्रेस भी देना होगा। शिकायत समाधान, आपत्तिजनक कंटेट की निगरानी, कंप्लायंस रिपोर्ट और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने जैसे नियमों का पालन भी करना होंगे। कोई आपत्तिजनक सामग्री हटाते समय उपभोक्ता को पहले से जानकरी देनी होगी कि उसमें क्या आपत्तिजनक था।

बढ़ गई हैं ट्विटर की मुश्किलें

सरकारी सूत्रों ने बुधवार को कहा कि ट्विटर ने अब मध्यस्थ का दर्जा खो दिया है, जिसका अर्थ है कि इसे अब किसी भी अन्य डिजिटल समाचार प्रकाशक की तरह माना जाएगा।

इसका मतलब यह होगा कि किसी भी उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की गई ‘गैरकानूनी’ और ‘भड़काऊ’ सामग्री के लिए प्लेटफॉर्म के शीर्ष अधिकारियों को भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है।

गूगल, फेसबुक, व्हाट्सएप, कू, शेयरचैट, टेलीग्राम और लिंक्डइन जैसे अन्य महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत दिए गए इस ‘सुरक्षा कवच’ के दायरे में हैं क्योंकि उन्होंने नए नियमों का पालन किया है।



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