देखो, इस पार पक्का बुरा मान जाऊँगा: ट्विटर से रविशंकर प्रसाद, 77वीं बार

28 जून, 2021 By: अजीत भारती
एक और अंतिम चेतावनी

ट्विटर ने भारत के उस मंत्री का अकाउंट एक घंटे के लिए अमेरिकी कॉपीराइट कानूनों के उल्लंघन के कारण बंद कर दिया जो 26 मई से ट्विटर को भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने पर ‘क्या-क्या उखाड़ सकते हैं’ की गिनती कुल 72 चैनलों पर 434 बार गिनवा चुके हैं। 26 मई का दिन उस तीन महीने के बाद आया था जब भारत सरकार ने नए आइटी कानूनों के प्रावधानों के अनुसार सारी बड़ी सोशल मीडिया कम्पनियों को तीन अधिकारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। ट्विटर ने उस अंतिम डेडलाइन के बाद कुल एक महीने बीत जाने पर भी, आज 26 जून तक भारतीय कानून को न तो माना है, न मानने की इच्छा रखता है।


वहीं रविशंकर प्रसाद जी 26 मई से सात-आठ बार लास्ट वार्निंग, तीन बार ‘एकदम से लास्ट वार्निंग’ और एक बार ‘फायनल वार्निंग सीरियसली फाइनल वार्निंग वर्जन तीन’ दे चुके हैं, और परिणाम ये हुआ कि कभी उपराष्ट्रपति, तो कभी संघ के महामहिम समेत कई अधिकारियों का ब्लू टिक गया, और कल तो मंत्री महोदय जी का ही ट्विटर एक्सेस एक घंटे के लिए उड़ा दिया गया। आप क्रोनोलॉजी समझिए: पहले अमेरिका में दंगाई जब व्हाइट हाउस पर पहुँचे तो ट्विटर ने उकसाने वालों के अकाउंट तुरंत बंद किए, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प का भी अकाउंट था। उसके बाद भारत में 26 जनवरी को मोलेस्टेशनदाताओं ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराया और भारत सरकार मुँह बाए देखती रह गई। खालिस्तानियों या उनके सहयोगियों का तो कुछ कर नहीं पाई तो फिर डैमेज कंट्रोल के लिए ट्विटर समेत सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए ‘सख्त कानून’ का प्रावधान किया।

सख्त कानून में सख्ती से कहा गया था कि अगर तीन महीने के अंदर उसका सख्ती से पालन नहीं हुआ त सरकार उन पर सख्त कार्रवाई करने को सख्ती से विवश हो जाएगी। तीन महीने बीत गए, एक ने भी सख्ती से तयछड़िए मुरझाए हुए रूप में भी पालन नहीं किया। तब रविशंकर प्रसाद सख्त हो गए कि सख्त कानून का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है तो टीवी पर जा कर सख्ती से इस सख्त कानून की सख्ती की बात कही जाएगी। आँखों में अंगारे लिए हुए मंत्री महोदय टीवी, पेपर, वोब पोर्टल, रेडियो, किचन, बाथरूम, कूड़ेदान आदि हर जगह सख्त रूप में दिखे। पूरा भारत साँस रोके देख रहा था कि अब तो सख्त कार्रवाई होगी और ट्विटर की तो बैंड बज जाएगी।

अब ये हुआ कि सरकार को कोई सख्त कार्रवाई न करता देख, ट्विटर ने सोचा कि किसी को तो सख्ती दिखानी होगी, उन्होंने भारत सरकार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के वैरिफिकेशन हटाने से ले कर, फॉलोवर कम करने शुरु कर दिए। तब रविशंकर प्रसाद जी और सख्त हुए कि अब तो बहुत हो गया, ये ट्विटर तो कानून ही नहीं मान रहा। फिर क्या था, मंत्री महोदय ने ये बड़े-बड़े अंगूठे निकाले, फोन हाथ में लिया और वो बड़े-बड़े ट्विटर थ्रेड लिख डाले कि ट्विटर तो मान ही नहीं रही है भारतीय कानूनों को।

लोगों में आनंद की लहर का संचार हुआ, आकाश से देवों ने पुष्पवर्षा की, अप्सराएँ ‘डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे’ कह कर उन्मादित होने लगी, आकाशवाणी हुई, तेज बिजली कड़की, सुंदर कन्याओं ने वंदनवार सजाए, छाती वैक्सिंग करवा चुके नवयुवकों ने स्वागतम् गीत गाए और ऐसा लगा कि अब भारतवर्ष में कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अशिष्ट कार्य नहीं करेगा।

लो एंड बिहोल्ड! मंत्री जी का ही अकाउंट बंद कर दिया दुष्टों ने। अब मंत्री जी शिकायत भी कहाँ करेंगे? कहने को तो मंत्री हैं लेकिन भीतर में तो आम आदमी ही हैं न? मंत्री जी का अकाउंट तो एक घंटे के लिए सस्पैंड हुआ लेकिन हमारे-आपके जैसे हजारों का तो परमानेंटली सस्पैंड ही है, तो क्या एक मंत्री उस पीड़ा को समझने के लिए स्वयं आम नागरिक वाली फीलिंग नहीं ले सकता? गर्लफ्रेंड न बन, न सही पर फील तो दे दे बैरन!

तो एक मंत्री ने चाणक्य नीति के हिसाब से कार्य किया है। हम और आप हमेशा कहते हैं न कि भैया ये वीआईपी कल्चर बंद होना चाहिए? तो मंत्री जी ने स्वतः बंद कर लिया और आम लोगों की तरह ट्विटर बंद करने की शिकायत पहले ‘कू’ पर की, फिर जब ट्विटर वापिस आया तो ट्विटर पर सख्ती से एक पूरा थ्रेड लिख दिया। आपको पता भी है कि मंत्री लोग कितने व्यस्त होते हैं? ऐसे में अगर वो समय निकाल कर ट्विटर पर लिख रहे हैं, इसका मतलब है कि काफी गंभीरता और सख्ती से सोचा जा रहा है।

किसी मसखरे ने कह दिया कि कैसा रोंदू मंत्री है, दिन-रात रोता रहता है। बताइए! ये संस्कार दिए हैं आपको माता-पिता ने? आप अब मंत्री महोदय से बिना सम्माननीय या पूजनीय प्रयोग किए बात करेंगे? स्कूल में कुछ सिखाया नहीं गया एप्लीकेशन लिखते वक्त कि ऑनरेबल, रेस्पेक्टेड, हम्बली, ट्रूथफुली लिखना होता है? तो आपको यह कहना चाहिए न कि कैसा सम्माननीय रोंदू मंत्री है, कैसा पूजनीय नकारा आदमी है ये, कैसे बेकार के ऑनरेबल मिनिस्टर हैं ये? स्कूल की बातें अगर आप भूल जाएँगे, तो आप कहीं के नहीं रहेंगे।

अब देखिए कि ट्विटर को ले कर दो बाते हैं। पहली यह है कि भारत सरकार ने आज तक यह नहीं बताया कि ट्विटर अगर तीन अधिकारी समयसीमा के भीतर नियुक्त नहीं करेगा तो सरकार उसका क्या उखाड़ेगी, क्योंकि ट्विटर ने समयसीमा भी बीतने दिया, तीन महीने की डेडलाइन के बाद भी आज एक महीना और बीत गया, साथ ही एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं हुआ जिसका प्रावधान किया गया है। तो भारत सरकार ने क्या किया? भारत सरकार ने दस और इंटरव्यू दिए कि देखिए, ट्विटर तो मान ही नहीं रहा है, भारत का ऑफ लैंड लॉ है। सॉरी, लैंड का भारत ऑफ लॉ है। माफ कीजिएगा, लॉ का लैंड ऑफ भारत है। अरे आप समझ ही गए होंगे कि किसका क्या है। कुल मिला कर मंत्री महोदय ने बार-बार बताया है कि भारत एक देश है और ट्विटर की यहाँ नहीं चलेगी। परिणाम यह हुआ कि ट्विटर ही देश बन गया है और भारत की ही नहीं चलने दे रहा।

दूसरी बात यहाँ यह है कि मंत्री जी के पास तीन अधिकारियों की नियुक्ति के बाद ऐसा क्या मैकेनिज्म है जहाँ सस्पैंड किए गए हैंडल पर सुनवाई हो या फिर आप जब भी किसी फेक न्यूज या उकसाऊ खबर को ट्विटर से डिलीट करने कहते हैं, और वो डिलीट नहीं करता, तो आप क्या करेंगे? कॉन्ग्रेस टूलिकट पर लिखने के लिए संबित पात्रा समेत कई लोगों के ट्वीट के नीचे मैनिपुलेटेड मीडिया लिखने वाले ट्विटर को गाजियाबाद में अहमद की दाढ़ी काटने वाले फेक न्यूज को हटाने में सप्ताह से ज्यादा समय लग गया। फेक न्यूज फैलाने वाले अभी भी प्लेटफॉर्म पर हैं, और सरकार ट्विटर के एमडी तक को तलब नहीं कर पा रही।

जुबैर पर FIR कर के सरकार कह रही है कि उसे गिरफ्तार करने का कोई इरादा नहीं है, हमें तो बस पूछताछ करनी है। क्या करोगे पूछताछ? उसने सफाई तो लिख ही दी है, इससे इतर वो ऐसा क्या बता देगा पूछताछ में? ये तो सरकार के हाल हैं कि ये FIR करते हैं, और राणा अय्यूब या ट्विटर के एमडी कर्नाटक से बेल ले लेते हैं, और ये कुछ नहीं कर पाते।

इनका सारा समय ट्विटर पर रह कर, ट्विटर को सख्त संदेश देने में बीतता है। इनमें साहस नहीं है कि वो एक दिन के लिए भी ट्विटर को भारत में बंद कर सकें। तुम्हारे मंत्री का बंद किया न अकाउंट, तुम कर दो उसे बंद एक दिन को लिए। तुम्हारे उपराष्ट्रपति को अनवैरिफाइ किया न, तुम ट्विटर जैसी संस्था और उसके कर्मचारियों को भारत में पर्सोना नॉन ग्राटा बना दो। ये नहीं कर पाओगे क्योंकि तुम्हारी औकात नहीं है अमेरिकी कम्पनी को बंद करने की, चाहे जितना सुपर पावर बनने के पुलाव भारतीय जनता को बेचते रहो। चीन की बयालीस कम्पनियाँ बंद करवा दी तुमने। इनमें से सिर्फ बाइटडांस ने, जो टिकटॉक एप्प चलाती है, 2020 में 35 बिलियन डॉलर का व्यवसाय किया। ट्विटर का उसी साल का व्यवसाय कुल पौने चार बिलियन डॉलर का था, यानी बाइटडांस का लगभग दस प्रतिशत।

तुम अमेरिका को नाराज नहीं कर सकते, जबकि उसने कभी भी तुम्हारा हित नहीं देखा, वो हमेशा अपना हित देखता है। वैश्विक शक्तियाँ तीसरे राष्ट्र की प्रतिक्रिया से नहीं डरतीं, उसकी इच्छा होती है तो वो दक्षिण चीन सागर में आइलैंड बनाता है, समुद्रों में न्यूक्लियर विस्फोट करता है, 13000 किलोमीटर दूर से सीरिया में मिसाइल फेंकता है और दुनिया को बताता है कि उसे किसी को कुछ एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं। भारत वैश्विक शक्ति बनने के सपने देखता है और वैसा होने की जगह चिल्लाता है कि वो अब तीन साल के भीतर तो सुपर पावर बन ही जाएगा।

सुपर पावर भीगी बिल्लियों की तरह व्यवहार नहीं करता। यहाँ ट्विटर को बैन करना तो दूर की बात है, ट्विटर के भारतीय एमडी तक को तुम नहीं बुला पा रहे, उसका ऑफिस तक सील नहीं हो रहा तुमसे, तुम अपनी नपुंसकता भारतीय कानूनों को पीछे छुपा लेते हो कि देखिए उसे तो हमारे ही कोर्ट ने राहत दे दी है, हम क्या करें। हम क्या करें? अरे, खींच लो घर से ऐसे कर्मचारियों को जिनके लिए न तो तुम्हारी, न इस समाज की, न इस राष्ट्र के कानून की कोई गरिमा बची है।

हम पक गए हैं रविशंकर प्रसाद जी, क्या आपको ट्विटर पर लोगों के ट्वीट नहीं दिखते जो आपके ही ट्वीट को कोट करते हुए आपकी और आपके सरकार की निर्लज्जता, कायरता और नपुंसकता पर विचार लिख रहे हैं। लोग थक गए हैं ये सुन-सुन कर कि भारत का अपना कानून है जो ट्विटर को मानना होगा जबकि होता क्या है? होता यह है कि भारत के मंत्री का अकाउंट किसी यूएस के कानून के तहत, भारत की ही धरती पर बंद कर दिया जाता है। आप समझ रहे हैं इस बात की गंभीरता को? मंत्री चिल्ला रहे हैं कि भारत का कानून ट्विटर को मानना होगा क्योंकि वो भारत में ऑपरेट कर रहा है, ट्विटर क्या कर रहा है? वो भारत के मंत्री पर अमेरिका का कानून लगाता है और उसे अपनी जगह दिखला देता है।

फिर मुझे लगता है कि आखिर क्या कारण हो सकता है भारत के एक मंत्री के निकम्मेपन का? आखिर ये अपने कार्यों का निष्पादन क्यों नहीं कर पा रहे? हिन्दू हैं, सनातनी होने का दावा करते हैं, घर में गीता की प्रतियाँ हैं, संविधान और कानून के तो सारे खंड हर दिन वैक्सूम क्लीनर से धूल-धूसरित होने से बचाए जाते हैं, फिर ऐसा क्यों?

तब मुझे ध्यान आता है गीता के तीसरे अध्याय के बाईसवें श्लोक का जहाँ भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं:

न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन ।
नानवाप्तमवाप्तव्यम् वर्त एव च कर्मणि ॥ २२ ॥

अर्थात्, हे पार्थ ! मुझे इन तीनों लोकों में न तो कुछ कर्तव्य है और न कोई अप्राप्य वस्तु प्राप्त करना है, फिर भी मैं कर्म में ही बरतता हूँ।

मतलब, भगवान कृष्ण तक ने धरती पर अपना निर्धारित कर्म किया है, तभी मुक्ति मिली। लेकिन रविशंकर प्रसाद जी को ले लीजिए, वो योगेश्वर कृष्ण से भी आगे की चीज प्रतीत होते हैं। कल्कि के पीछे की हैं या नहीं, ये मैं पूरे विश्वास के साथ नहीं कह सकता, लेकिन कृष्ण से तो आगे हैं, ये मैं आपको नकली स्टाम्प पेपर पर लिख कर दे सकता हूँ। कृष्ण भगवान के पास सब कुछ था। सेना, मित्र, प्रजा, परिवार, धन, धर्म… मतलब जिन्हें संपूर्ण पुरुष कहा गया है, फिर भी उन्होंने गीता में कृष्ण को याद दिलाया कि हम सब एक कार्यवश भारतभूमि पर आए हैं, और उसका निष्पादन ही हमारा मुख्य कर्तव्य है। रविशंकर प्रसाद जी का कहना है कि उन्हें भारत सरकार में कई कर्तव्य निर्देशित हैं, और कई अप्राप्य वस्तुओं/सेवाओं को प्राप्त भी करना है, फिर भी वो कोई कर्म नहीं करना चाहते।

जो आदमी गीता के भी आगे निकल चुका हो, उसे ये दो टके के यूट्यूबर सिखाएँगे कि क्या करना है!



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