केजरीवाल-ठाकरे: 'बेस्ट CM' और मोहल्ला क्लिनिक वाले राज्यों में कोरोना का प्रबंधन क्यों है फिसड्डी

21 अप्रैल, 2021 By: अजीत भारती
महाराष्ट्र और दिल्ली का कोरोना प्रबंधन इन दोनों मुख्यमंत्रियों की महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ा है

आज देश के दो ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बारे में बात करेंगे, जो कभी चर्चा से बाहर रहते ही नहीं। जनता के लिए इन लोगों ने उतना काम नहीं किया, जितना इसका प्रचार किया है। कोरोना प्रबंधन के मामले में इन दोनों राज्यों का यह हाल है कि भारत में कोरोना संक्रमण के 31% मामले और संक्रमण से 41% मृत्यु सिर्फ इन दो राज्यों की 10.5% जनसंख्या में दर्ज की गई है।

दिल्ली की यदि बात करें तो केजरीवाल सरकार के अंतर्गत कोरोना संक्रमण का ग्राफ़ हमेशा बढ़ता ही नजर आया। बीच में यह ग्राफ तब स्थिर हुआ, जब गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिल्ली की कमान संभाली गई। इस दौरान, केजरीवाल के ‘मोहल्ला क्लिनिक’ मॉडल पर एक बार भी बात नहीं की गई।

दिल्ली में एक बार फिर कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस कर्फ्यू से सर्वाधिक प्रभावित श्रमिक वर्ग होता आया है। इस बार फिर इस वर्ग के साथ यही किया गया है और लोग राजधानी से पलायन करने लगे हैं।

दिल्ली में महज दो दिन के भीतर कंटेनमेंट जोन की संख्या 1200 बढ़ाई गई है। अब कुल 9929 कंटेनमेंट जोन बन चुके हैं। सिर्फ 1.8 करोड़ की जनसंख्या वाले एक केंद्रशासित प्रदेश में केजरीवाल सरकार का प्रबंधन यह कंटेनमेंट जोन बयाँ कर रहे हैं।

जब लोग इस कुव्यवस्था को लेकर सवाल उठाने लगे, तब जा कर ऑक्सीजन की कमी पर केजरीवाल सरकार बात कर रही है। अमित शाह के प्रबंधन के अलावा केजरीवाल सरकार अपने स्तर पर इस एक साल में कुछ भी व्यवस्था तैयार करने में नाकाम रही है। भारत में कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु में पूरे देश की कुल मृत्यु दर का 6.8% सिर्फ दिल्ली से है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार इस पूरे कोरोना प्रकरण के बीच ख़बरों में रही। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की स्थिति लगातार बदतर ही रही। फिल्म इंडस्ट्री के कुछ चुनिन्दा लोग ठाकरे सरकार को ‘बेस्ट सीएम’ का भी ख़िताब देते रहे।

महाराष्ट्र राज्य में संक्रमण से होनी वाली मृत्यु का प्रतिशत कभी भी कम नहीं हुआ। न ही हॉटस्पॉट को लेकर कोई व्यवस्था की गई, ना ही अस्पतालों को ऐसे हालात के लिए तैयार किया गया।

इस बार महाराष्ट्र में दिल्ली से पहले ही लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। श्रमिक महाराष्ट्र से भी पलायन को फिर से मजबूर हैं। भारत और महाराष्ट्र की यदि बात करें तो पूरे देश के एक चौथाई मामले सिर्फ महाराष्ट्र राज्य से हैं।

ये दो ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो केंद्र सरकार को कोसने का एक भी अवसर नहीं छोड़ते हैं। जिन उत्तर प्रदेश, बिहार के श्रमिकों को हर बार पलायन करने को विवश होना पड़ता है, वह इन दोनों लीडर्स की महत्वकांक्षा की भेंट चढ़ते हैं।

इस विषय पर विस्तृत चर्चा आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं:



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