तालिबान वही कर रहा है जो भगत सिंह ने किया: Unacademy के शिक्षक के बयान पर बवाल

04 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
'अनएकेडमी' के एक शिक्षक के बयान पर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है

भारत में इतिहास के साथ वामपंथी इतिहासकारों की छेड़छाड़ किसी से छुपी नहीं है। आज़ादी के बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था कम्युनिस्ट और इस्लामी विचारधारा वाले लोगों के हाथ में थी, और उन्होंने बच्चों को तोड़-मरोड़ कर वही पढ़ाया, जो उनके अजेंडे पर फिट बैठती थी।

कम्युनिस्ट विचारधारा वाला ये इस्लाम-परस्त लिबलर गैंग आज़ादी के नायकों और क्रांतिकारियों तक से भी छेड़छाड़ करने से बाज नहीं आता। लिबरल गैंग अभी तक शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम से वामपंथ के रक्तपात को सही बताते नहीं थकता था, लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार भगत सिंह की तुलना देशद्रोहियों और इस्लामी आतंकियों से की जाने लगी है।

ताजा मामले में सभी हदें पार करते हुए ऑनलाइन परीक्षा की पढ़ाई कराने वाले ‘Unacademy’ के ‘शिक्षक’ अनिल खन्ना ने भगत सिंह की तुलना तालिबान से कर दी है। खन्ना ने एक वीडियो में कहा है कि आजादी से पहले भारत और भगत सिंह वही कर रहे थे जो तालिबान कर रहा है।

Unacademy के ‘टॉप फैकल्टी’ कहे जाने वाले अनिल खन्ना ने तालिबान पर विचार रखते हुए कहा है:

“तालिबान को हम सभी गाली देते हैं। अगर देखा जाए हम भारतीय क्या कर रहे थे, जब ब्रिटिश यहाँ थे? भगत सिंह क्या कर रहे थे? वो मेरे हीरो हैं। वो भी यही कर रहे थे जो तालिबान कर रहा है।”

व्याख्यान में उन्होंने तालिबान का महिमामंडन किया है। इस तुलना ने भगत सिंह के चाहने वालों की भावनाओं को भड़काने के साथ ही इस्लामी आतंकियो द्वारा की गई यातनाओं को पुनर्जीवित करने का काम भी किया है।

हालाँकि इस वीडियो के प्रकाश में आने पर अनिल खन्ना ने एक वीडियो जारी कर इस पर खेद भी प्रकट किया और यह कहते हुए क्षमा भी माँगी कि तालिबान की तुलना हमारे आजादी के नायकों से नहीं की जा सकती। अनिल खन्ना ने कहा कि यह मात्र एक चर्चा के बीच की गई बातचीत थी, लेकिन वो इसे लेकर माफ़ी माँगते हैं।

अनिल खन्ना के इस बयान में सबसे पहली आपत्ति यह थी कि ‘लिबरल’ वर्ग भगत सिंह की तुलना ऐसे आतंकियो के साथ कर रहा है, जिनकी लड़ाई अपने मजहब के लिए है और जो महिलाओं, बच्चों की बर्बर हत्याओं से लेकर जघन्य ब्लात्कारों तक के जिम्मेदार हैं।

ये पूरी तरह भ्रमित लोग हैं क्योंकि ये समझ नही पा रहे हैं कि ये सिर्फ बर्बर आतंकी संगठन तालिबान को क्रांतिकारी ही नहीं बताना चाह रहे हैं, बल्कि भगत सिंह को भी तालिबान आतंकियों जैसा बर्बर बता रहे हैं। अधिकतर अवसरों पर लिबरल्स को खुद भी नहीं पता होता कि वो बोल क्या रहे हैं।

इस तुलना ने भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी वीर के अदम्य साहस पर प्रश्नचिन्ह भी खड़े कर दिए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बवाल भी शुरू हो गया है। लोग पूछ रहे हैं कि शहीद भगत सिंह ने कितनी हत्याएँ, रेप और आतंकी हमले किए थे। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शिक्षा देने वाले लोग ऐसी मानसिकता के होंगे तो देश के बच्चे ऐसी ही बातें सीखेंगे।

कॉन्ग्रेस ने बताया था भगत सिंह को ‘आतंकी’, कन्हैया कुमार से भी की गई तुलना

इससे पहले कॉन्ग्रेस ने भगत सिंह की तुलना ‘टुकड़े गैंग’ के सरगना कन्हैया कुमार से की थी। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने देशद्रोह के आरोप में जेल जा चुके कन्हैया कुमार की तुलना भगत सिंह से करते हुए कहा था, “भगत सिंह अपने जमाने के कन्हैया कुमार थे। देश को कृष्ण और कन्हैया दोनो की जरूरत है।”

सिर्फ यही नहीं कॉन्ग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में शहीद भगत सिंह को डीयू के पाठ्यक्रम में आतंकवादी बताया था। यूपीए सरकार के कार्यकाल में डीयू की इतिहास की किताब में शहीद भगत सिंह और चन्द्रशेखर जैसे देशभक्तों को आतंकी के तौर पर प्रस्तुत किया गया था।

‘इंडियाज स्ट्रगल फार इंडिपेंडेंस’ के नाम से प्रकाशित पुस्तक में राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए प्राण न्योछावर करने वाले महान देशभक्तों के कृत्यों को आतंकी घटना के तौर पर दर्शाया गया था। इस पुस्तक के प्रकाशन में शामिल पाँचों लोग कॉन्ग्रेस से जुड़े थे, इनमें से चार जेएनयू में प्रोफेसर थे।

ये सभी लोग कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में निदेशक और अध्यक्ष पदों पर काबिज रहे थे। यूपीए और कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में ऐसी अनेक झूठी और मनगढ़ंत कहानियों को इतिहास बताकर किताबों और पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था, जिसे आज की पीढ़ी सच मान लेती है।

CPM ने भी की थी भगत सिंह की तुलना मोपला आतंकी से

इससे पहले केरल में सीपीएम ने शहीद भगत सिंह की तुलना मोपला में सैकड़ों हिंदुओं का नरसंहार करने वाले इस्लामी आतंकियों से की थी। केरल विधानसभा के अध्यक्ष एमबी राजेश ने भगत सिंह की तुलना इस्लामिस्ट और कम्युनिस्ट वेरियन कुन्नाथु कुंजाहमद हाजी से की थी।

यह तुलना एमबी राजेश ने हिंदू नरसंहार के 100 साल पूरे होने कही थी। बता दें कि कुंजाहमद हाजी ही वो शख्स था जिसकी शह पर मालाबार में हिंदुओं का नरसंहार किया गया था।

मालाबार दंगा केरल में पहला संगठित आतंकवादी हमला था। इस हमले में केरल में लगभग 10,000 हिंदुओं का सामुहिक नरसंहार किया गया था।

इस सामुहिक नरसंहार के दौरान करीब एक लाख हिंदुओं को केरल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस्लामी आतंकियों द्वारा 100 के करीब मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया और असंख्य हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन हुआ था।



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