चीन-रूस की चुप्पी के बीच तालिबान को मिली UNSC की मान्यता: भारत ने रखी ये शर्तें

01 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
भारत ने तालिबान के समक्ष कुछ कड़ी चुनौतियाँ रखी हैं

करीब दो दशक की जंग के बाद अमेरिका के अंतिम विमान और अंतिम सैनिक ने भी अफ़ग़ानिस्तान की जमीन से वापसी कर ली है। इसके बाद भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक प्रस्तुत प्रस्ताव पर मोहर लगा दी है। तालिबान में चल रहे सत्ता-संघर्ष पर भारत निरंतर नजर टिकाए हुए है एवं परिस्थितियों की समीक्षा कर रहा है।

UNSC द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के तहत तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान में मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही, तालिबान से ‘आतंकी गिरोह’ का चिन्ह भी हटा लिया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस निर्णय के बाद तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक हिस्सा बनने जा रहा है।

15 अगस्त, 2021 को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल समेत संपूर्ण देश पर तालिबान का कब्ज़ा होने के बाद से ही देश में अराजकता का माहौल है। जहाँ एक ओर विश्वभर में तालिबान द्वारा देश में मचाए जा रहे उपद्रव की तस्वीरें और वीडियो फैल रहे हैं, वहीं UNSC ने इस मामले को लेकर एक गंभीर निर्णय लिया है।

भारत समेत 13 देशों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। हालाँकि वीटो पावर रखने वाले देश चीन और रूस ने इस मामले के फैसले से दूरी बना ली थी।

बता दें कि UN के जिस सत्र में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, उसकी अध्यक्षता भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला द्वारा की गई थी। उन्होंने मामले को लेकर कहा कि इस प्रस्ताव में जो बातें रखी गई हैं, उनमें से अहम हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश को धमकाने, बदला लेने या फिर आतंकवाद के लिए न किया जाए।

उल्लेखनीय है कि अगस्त माह के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास ही है और भारत द्वारा ही इस बयान पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस निर्णय के माध्यम से राजधानी काबुल को एक कड़ा संदेश देना चाह रहे हैं।

हालाँकि, UNSC ने अपने दस्तावेज में ‘तालिबान’ शब्द के प्रयोग से दूरी बनाए रखी। बता दें कि तालिबान के समक्ष अब अफ़ग़ानिस्तान में करीब 3.8 करोड़ की आबादी पर शासन करने की बड़ी चुनौती है। इसके लिए अफ़ग़ानिस्तान पूर्ण रूप से अंतरराष्ट्रीय सहायता पर ही निर्भर है।

आतंक के लिए प्रयोग न हो अफगानी भूमि 

प्रस्ताव पारित करने के साथ ही साथ ही भारत ने अफगानिस्तान पर पिछली से कहीं अधिक सख्त बयान प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम जारी किए गए इस समन में 26 अगस्त, 2021 को काबुल के हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसके उपरांत यह भी कहा गया कि अफ़ग़ानी क्षेत्र में किसी अन्य आतंकी संगठन को प्रशिक्षण देने इत्यादि का कार्य न किया जाए।


साथ ही, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं बच्चों एवं अन्य अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के विषय में भी मुद्दा उठाया गया। बता दें कि तालिबान द्वारा कब्ज़े के बाद से ही अफगानिस्तान में शरिया कानून लगाने की माँग कर दी गई थी और महिलाओं के साथ कई अमानवीय घटनाओं के भी समाचार आए थे। 

इस पूरे प्रकरण में रूस एवं चीन कन्नी काटते दिखे। पूरे मामले पर रूसी दूत वेसली नेबेन्ज़िया ने कहा कि यह प्रस्ताव आतंकी खतरों के बारे में पर्याप्त रूप से विशिष्ट नहीं था। इसमें अफ़गानों को देश से निकालने की योजना भी ठीक तरह से नहीं रखी गई थी।

उन्होंने आगे कहा कि अफ़ग़ानिस्तान पर प्रस्ताव पर मतदान से मॉस्को को मजबूरन हाथ पीछे खींचना पड़ा क्योंकि ड्राफ्ट तैयार करने वालों ने उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को नज़रअंदाज कर दिया था।



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