UP 2022: पानी, वैक्सीन, रोजगार पर खोड़ा गाँव के लोगों ने क्या कहा #GroundReport

09 सितम्बर, 2021 By: पुलकित त्यागी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (ग्राउंड रिपोर्ट)

क्षेत्रफल में चौथे और जनंसख्या के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। वर्ष 2022 की प्रथम तिमाही में ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे और प्रदेश समेत राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों ने भी इसके लिए पूरी कमर कस ली है। सरपंचों और विधायकों से लेकर पार्टी प्रमुखों द्वारा प्रदेश के मतदाताओं को लुभाने का सम्पूर्ण प्रयास प्रारम्भ हो गया है।

उत्तर प्रदेश-बिहार की राजनीति सदा से जटिल रही है, बड़े बड़े चुनाव समीक्षकों से लेकर स्वयं को राजनीतिक विशेषज्ञ बताने वाले भी हर तरह के समीकरण बिठाने के बाद भी अपने द्वारा लगाए गए अनुमानों में गच्चा खा जाते हैं। 

चुनाव हैं तो समीक्षाएँ होंगी ही और समीक्षाएँ होंगी तो पूर्वानुमान लगने भी सामान्य हैं। परिणाम किसी के भी पक्ष में आए परन्तु मीडिया सदा से लोकतंत्र के पर्व माने जाने वाले उत्सव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। चुनावों से पहले लोगों के विचार जानना, स्थानीय और राज्य स्तर के मुद्दों पर उनकी राय साथ ही अपने स्थानीय एवं मुख्यमंत्री स्तर के नेताओं को लेकर जनता के विचार जानना आवश्यक हो जाता है। 

इसी खोज में जनता के विचार जानने हमारी डू-पॉलिटिक्स की टीम ने भी अपनी उत्तर प्रदेश की चुनावी यात्रा प्रारंभ की। डू-पॉलिटिक्स टीम ने सर्वप्रथम गौतम बुद्ध नगर ज़िले के नोएडा से शुरूआत करते हुए उत्तर प्रदेश की जनता का हाल जाना। नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों से हमने लोगों से बातचीत और स्थानीय मुद्दों पर उनके विचार जानने का प्रयास किया।

इसमें हम सर्वप्रथम नोएडा के सेक्टर-56 स्थित खोड़ा गाँव में पहुँचे। ऊपरी तौर पर देखने में गाँव सामन्य ही प्रतीत हो रहा था। गाँव की सड़कें अति उत्तम श्रेणी की तो नहीं थीं परंतु सड़कों की हालत पूरी तरह जर्जर भी नहीं थी।

विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

देखकर कहा जा सकता है कि सड़क बनवाने पर ठीक-ठाक मेहनत की गई थी। हम गाँव के वैक्सीनेशन सेंटर पहुँचे जहाँ एक ओर गाँव वालों को महामारी से लड़ने के लिए टीका लगवाने की उत्सुकता और जागरूकता देखकर प्रसन्नता हुई तो वहीं दूसरी ओर वैक्सीनेशन सेंटर में अव्यवस्था भी देखने को मिली।

पानी की समस्या है गंभीर मुद्दा 

वैक्सीनेशन सेंटर पर ही हमारी सर्वप्रथम मुलाकात विष्णु प्रकाश चतुर्वेदी से हुई और प्रदेश में महामारी और उसके चिकित्सा को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विष्णु प्रकाश ने सराहना करते हुए बताया कि लगभग सभी जगहों के वैक्सीनेशन सेंटरों पर सरकार ने अच्छी व्यवस्था की हुई है।

खोड़ा गाँव के रहने वाले विष्णु ने हमें आगे गाँव के स्थानीय मुद्दों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि गाँव में पानी की बहुत समस्या है। जल स्तर नीचे जा चुका है एवं इस मामले पर सरकार और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम भी देखने को नहीं मिलते हैं।


विष्णु ने हमसे किसान आंदोलन और गन्ने के रुके हुए भुगतान को लेकर भी बात की जिस पर उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय में ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द किसानों का रुका हुआ गन्ने का भुगतान कराना चाहिए।

गाँव के ही रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने भी पानी की समस्या को क्षेत्र का यह मुद्दा बताया इसके साथ-साथ उन्होंने बिजली के बढ़े हुए दामों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद से क्षेत्र में बिजली कटने की समस्या का तो समाधान हो गया है, परंतु बिजली का दाम बहुत अधिक है।

बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में ही बिजली के दाम 8-9 रुपए प्रति यूनिट तक बढ़े हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब 2012 में मनमोहन सिंह कि कॉन्ग्रेस सरकार के समय महँगाई बढ़ी थी तो भाजपा द्वारा उसको लेकर भारी विरोध किया गया था परंतु अब जब सिलेंडर जैसी आवश्यक चीजें ₹800 से अधिक के दामों में मिल रही है तो कहीं कोई विरोध नहीं है। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घर-घर में चूल्हा और सिलेंडर पहुँचाए जाने के बात पर भी उन्होंने कहा की कि यह वैसी ही प्रक्रिया है कि जैसे सरकार ने ₹100 जनता तक पहुँचाने की बात कही और ₹96 सरकारी लोग और प्रशासन ही खा गया। 

उन्होंने आगे यह भी कहा कि भले ही वर्तमान सरकार द्वारा काम कैसा भी हो रहा हो, परंतु सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा प्रदेश में अभी उस स्थिति में नहीं हैं जहाँ वे मुख्यमंत्री योगी को हरा पाएँ।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने अंत में कहा:

“हमें अगर कोई पार्टी, या कोई राजनीतिक चेहरा पसंद नहीं आएगा, तो हम जाकर नोटा का बटन दबा देंगे।”

राम हैं देश के आराध्य 

स्थानीय निवासी मनीष सिंह ने कहा कि जिस तरह सड़क और नालियों का व्यवस्थित तरह से निर्माण किया गया है वैसे ही अगर क्षेत्र के पानी की समस्या पर भी ध्यान दिया जाए तो बेहतर होगा।

इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर निर्माण को भी राज्य का एक अहम मुद्दा बताते हुए कहा:

“राम मंदिर निर्माण का तो चुनावों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा क्योंकि राम तो देश में सभी के आराध्य हैं और उनके जन्म के स्थान पर उनका मंदिर बन रहा है तो इससे किसी को क्या समस्या हो सकती है? बाबर तो यहाँ के थे नहीं फिर चाहें कहने वाले कुछ भी कहते रहें।”

देशभर में समुदाय विशेष के साथ होने वाले कथित भेदभाव पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, जब कोरोना महामारी के दौरान किसानों एवं अन्य गरीबों के खातों में सरकार द्वारा पैसा भेजा गया था तो वह कोई जाति या संप्रदाय देखकर नहीं भेजा गया था। वह सभी को बराबरी से मिला। साथ ही कानून और न्यायिक व्यवस्था भी सभी संप्रदायों के लिए बराबर है।


वैक्सीनेशन सेंटर पर खराब प्रबंधन 

वैक्सीनेशन सेंटर पर कोरोना की दवा लगवाने आई महिलाओं से बातचीत के दौरान हमने यह पाया कि प्रशासन द्वारा सेंटर पर दवाइयों की व्यवस्था तो संपूर्ण कराई गई थी, परंतु लोगों की सुविधा के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया था।

महिलाओं और पुरुषों की कतारें तक अलग नहीं थीं एवं कुछ महिलाओं ने यहाँ तक बताया कि उन्हें टीका लगवाने के लिए सुबह 9 से दोपहर 2-3 बजे तक लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।


महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारतीय जनता पार्टी यह दावा करती है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में महिलाओं को पूरी सुरक्षा और सहूलियत प्रदान की है। इस पर खोड़ा की स्थानीय महिलाओं ने कहा कि उनके क्षेत्र की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं हो गई है, परंतु पिछले कुछ वर्षों में थोड़ा सुधार अवश्य हुआ है।

अपराध समाप्त हुए परन्तु रोज़गार बड़ी समस्या 

बिहार के भागलपुर से संबंध रखने वाले और 20 वर्षों से खोड़ा गाँव में ही बसे एक व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था के प्रशंसा की। उन्होंने कहा :

“प्रदेश में सबसे अच्छी बात यह है कि सभी अपराधियों का सफाया किया जा रहा है।”

राम मंदिर के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लगा कि देश में 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।


रिक्शा चलाकर जीवन यापन करने वाले होशियार सिंह ने हमसे बातचीत में रोजगार को एक अहम मुद्दा बताया उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ काम तो अच्छे किए हैं परंतु रोजगार के मामले पर सरकार विफल रही है।

कई जगह लोगों के भूखे मरने जैसी नौबत भी आई हैं। मुख्यमंत्री योगी के रोज़गार योजनाओं को लेकर होशियार सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा कुछ खास रोज़गार नहीं दिया गया है, केवल शौचालय बनवाए गए हैं।

राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा:

“मंदिर बन रहा है यह अच्छी बात है और हम चाहते हैं कि और मंदिर बनने चाहिए, परंतु सरकार का इसमें क्या लेना-देना? गरीब आदमी को केवल सरकार से रोज़गार चाहिए चाहें वह किसी भी पार्टी की सरकार क्यों न हो।”

उन्होंने आगे पूछने पर बताया कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएँ, जैसे कि राशन इत्यादि की उन्हें कोई सुविधा नहीं मिली। उनके मालिक और मकान मालिकों ने ही उनकी सहायता की और महामारी के दौरान उनका पेट पाला। उन्हें यहाँ तह कहा कि आज तक उनसे क्षेत्र का कोई चुना हुआ प्रतिनिधि मिलने तक नहीं आया है।


होशियार सिंह ने आगे बताया कि घर जैसी सरकारी योजनाएँ अभी उन तक नहीं पहुँची हैं। क्षेत्र में भी केवल उन्हीं को योजनाओं का लाभ मिला है जिनके पास पहले से ज़मीनों हैं और उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है। गरीब और ज़रूरतमंद को इनका कोई लाभ नहीं मिला है।

खोड़ा गाँव में लोगों से बातचीत कर मूलतः पानी की समस्या सामने आई। लोगों ने कहा कि वह इसी को आधार बनाकर आने वाले विधानसभा चुनावों में वोट देंगे। साथ ही रोजगार इत्यादि के मुद्दों पर भी क्षेत्र के मजदूरों ने अपने विचार रखे और कहा कि सरकार ज़रूरतमंदों तक रोज़गार और सेवाएँ पहुँचाए।

खोड़ा के अधिकतर लोगों ने यही कहा कि मुख्यमंत्री और ऊपरी प्रशासन द्वारा तो सभी योजनाएँ लाई जा रही हैं परंतु निचले स्तर पर सरकार के नुमाइंदे उन्हें पूरी तरह लोगों तक पहुँचाने में नाकाम हैं।



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