UP: मुहर्रम पर बैन से भड़के मौलाना, कहा- त्योहार नहीं, ये गम का महीना है.. डीजीपी होंगे जिम्मेदार

02 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
COVID-19 महामारी के मद्देनजर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुहर्रम के दौरान सभी धार्मिक जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया (प्रतीकात्मक चित्र/साभार:आउटलुक)

COVID-19 महामारी के मद्देनजर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुहर्रम (Muharram) के दौरान सभी धार्मिक जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया। इस नए सर्कुलर पर कुछ मजहबी संगठनों ने आपत्ति जताई है। मौलवियों ने सर्कुलर में ‘फेस्टिवल/त्योहार’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मुहर्रम ‘शोक का महीना’ है ना कि ‘त्योहार’।

मौलवियों ने उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा नोटिस में ‘मुहर्रम’ का उल्लेख करने के लिए ‘त्योहार’ शब्द के ‘बार-बार इस्तेमाल’ पर निराशा व्यक्त की है और यूपी सरकार से इसे ‘शिया समुदाय के खिलाफ आरोपपत्र’ करार देते हुए दिशा-निर्देशों को तुरंत वापस लेने की माँग की है।

उत्तर प्रदेश के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को भेजे गए पत्र में, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल ने निर्देश दिया है कि मुहर्रम को कोविड के लिए जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मनाया जाना चाहिए।

डीजीपी ने मौजूदा स्थिति को ‘बेहद संवेदनशील’ बताते हुए एसपी को उन इलाकों का अध्ययन करने को कहा, जहाँ मुहर्रम के दौरान घटनाएँ हुई हैं। पुलिसकर्मियों को ऐसी जगहों और वहाँ के हालात सामान्य रखने के लिए विशेष उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी मुकुल गोयल ने आदेश में कहा कि 10-19 अगस्त से 10 दिनों में, मुहर्रम के दौरान किसी भी जुलूस (ताज़िया) को निकालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए मौलवियों को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि कोविड के दिशानिर्देशों का पालन किया जा सके।

मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के मौलाना कल्बे जवाद (Maulana Kalbe Jawad) ने सर्कुलर की निंदा करते हुए कहा कि मुहर्रम पवित्र और गम का महीना है, और ये ऐसा त्योहार नहीं है, जिसमें लोग भाँग पीकर हुड़दंग करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने मुहर्रम की भावना और रूह को समझे बिना यह सर्कुलर जारी किया है और इसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।

कल्बे जवाद ने कहा कि डीजीपी के बयान पढ़कर ऐसा लगता है जैसे यह बयान अबू बकर बगदादी और ओसामा बिन लादेन ने जारी किया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बयान से पूरे प्रदेश में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच तनाव पैदा हो गया है और यदि इससे कहीं कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी डीजीपी की होगी।

नए दिशा निर्देशों पर आपत्ति जताते हुए मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मुहर्रम पाक महीना है, जिसमें बहुत ही शांतिपूर्ण और पवित्र कार्यक्रम होते हैं।

मौलाना ने सर्कुलर की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने ‘मुहर्रम’ के लिए सर्कुलर जारी कर मुहर्रम और शिया समुदाय की छवि खराब करने का प्रयास किया है। मौलाना जवाद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मुहर्रम के लिए बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी ने मुस्लिम समुदाय के और मुहर्रम की भावनाओं को बिना समझे ही यह सर्कुलर जारी किया है।

अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार (02 अगस्त, 2021) शाम एक बैठक बुलाई है। मौलाना कल्बे नूरी ने कहा कि मुहर्रम के दिशानिर्देश अस्वीकार्य हैं क्योंकि यह शांतिप्रिय शियाओं को खराब रोशनी में दिखाता है।

मौलाना ने की पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की माँग

मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने पुलिस के उस बयान पर भी अपनी नाराजगी जताई जिसमें कहा गया है कि मुहर्रम के कार्यक्रमों में यौन अपराध होते हैं। मौलाना ने पुलिस पर कार्रवाई करने माँग करते हुए कहा:

“डीजीपी साहब आपने यह बयान किस हालत में दिया है? आप होश में थे या नहीं? पूरे भारत से ऐसी एक घटना दिखाएँ, जहाँ मुहर्रम में यौन शोषण या ऐसी कोई घटना हुई हो? क्या आप मुहर्रम को बदनाम करना चाहते हैं? क्या आप झगड़ा कराना चाहते हैं? क्या आपने यह बयान देने से पहले कुछ सोचा? उन्होंने कहा कि मुहर्रम में गायों का वध किया जाता है, उनसे पूछा जाना चाहिए कि मुहर्रम के जुलूसों में गो-हत्या कहाँ की जाती हैं?”



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