खालिस्तानी षड्यंत्रों का शिकार, ऑस्ट्रेलियाई जेल में कैद है 24 साल का छात्र विशाल

10 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
24 वर्षीय विशाल को ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा कराई गई जेल

गत अप्रैल माह में ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय मूल के युवक को गिरफ्तार किया गया। 24 वर्षीय विशाल जूड पर आरोप लगाया गया कि उसने कथित तौर पर पगड़ीधारियों पर हमला किया। विशाल पर गम्भीर अपराध की योजना के साथ हथियार रखने जैसे आरोप लगाए गए।

जब कोई निर्धन या सामान्य परिवार का व्यक्ति एक अच्छे वातावरण एवं आर्थिक स्थिति की चाह में अपनी मातृभूमि को छोड़कर किसी अन्य देश में जाता है, तब उसकी उस देश के प्रति एक सकारात्मक मनोस्थिति होती है। वह सोचता है कि शायद कुछ संपन्न देश सोच एवं वातावरण में भी अधिक परिपक्व होंगे एवं वहाँ जाकर वह अपने लिए अच्छा भविष्य लिख सकेगा। 

अक्सर ऐसा देशों में पहुँचकर कुछ लोगों को यह पता चलता है कि वे वहाँ केवल उन नौकरियों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं, जो उस देश की एक संपन्न आबादी नहीं करना चाहती। ऐसे में भी गरीब परिवारों से गए लोगों को अपना रोजमर्रा का खर्चा चलाने के लिए गाड़ियाँ साफ करना या खाना पहुँचाने जैसी नौकरियाँ करनी पड़ती हैं। 

ऐसी स्थिति में जब किसी को जीवन चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ा रहा हो और एक समूह द्वारा आरोप लगाकर उसे जेल में डलवा दिया जाए तो इंसान की मनोस्थिति क्या होगी?

कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के हरियाणा के 24 वर्षीय युवक विशाल के साथ। विशाल को एक समूह द्वारा स्वयं पर हमला करने को लेकर आरोप लगाए गए तथा इस मामले में जेल करा दी गई। 

ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों की स्थिति 

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समूह द्वारा मेलबर्न एवं सिडनी जैसे कई शहरों में समय-समय पर विरोध एवं मार्च किए गए हैं। इनकी वजह हैं भारतीय मूल के लोगों पर जातिवादी हमले होना।

ऑस्ट्रेलिया में स्वयं को श्रेष्ठ समझने वाले गोरे लोगों के समूह द्वारा समय-समय पर इस प्रकार के जातिवादी हमले होते रहे हैं, परंतु न तो मीडिया न ही प्रशासन द्वारा इस प्रकार के के हमलों पर कभी ध्यान दिया जाता है।

खालिस्तान प्रकरण से जुड़ा है विशाल का मामला

यह पूरा मामला ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रहे खालिस्तानी विचारधारा वाले सिखों एवं अन्य भारतीयों के बीच की रंजिश का है। जिन हमलों के लिए विशाल पर आरोप लगाए गए हैं, वे तीनों ही कथित तौर पर सरदारों पर हुए हैं। ये सरदार स्वयं को भारतीय नहीं मानते अपितु खालिस्तानी विचारधारा एवं खालिस्तान जैसे अलग राज्य का स्वप्न रखते हैं।

 ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी विचाधारा 

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले सरदारों के बीच कट्टरपंथ चलाने में कई खालिस्तानी कथित नेताओं का हाथ है। ये सभी नेता इंटरनेट पर अपनी हिंदू-घृणा का प्रदर्शन करते देखे जा सकते हैं।

अमर सिंह नामक एक खालिस्तानी समर्थक द्वारा ऑस्ट्रेलिया में ‘टर्बन4ऑस्ट्रेलिया’ नामक एक संस्था बनाई गई है। इस आदमी ने ऑस्ट्रेलियन मीडिया के सामने यह कहा कि सरदारों की पगड़ी के कारण उन्हें चिन्हित कर उन पर हमले किए जाते हैं।

अमर सिंह का हिन्दू घृणा से लिप्त पोस्ट 

ऑस्ट्रेलिया से पहले भी कई ऐसी वीडियो आई हैं, जिनमें खालिस्तानी युवकों एवं अन्य भारतीयों की मुठभेड़ देखी जा सकती है। इन वीडियोज़ को सहारा बना कर खालिस्तानी समूहों द्वारा ऑस्ट्रेलिया में यह नैरेटिव गढ़ा गया कि पगड़ी पहने सिखों पर अन्य हिंदुओं (भारतीयों) द्वारा हमले किए जा रहे हैं।  


किसान आंदोलन की भूमिका 

भारत में चल रहे कथित किसान आंदोलन ने इस मामले को और गर्म कर दिया। ऑस्ट्रेलिया में विभिन्न स्थानों पर किसान आंदोलन को लेकर खालिस्तानियों द्वारा जुलूस एवं विरोध प्रदर्शन किए जाने लगे।

इन्हीं प्रदर्शनों में कई घटनाएँ पर्थ, सिडनी एवं मेलबर्न जैसे शहरों से सामने आईं, जहाँ पर खालिस्तानियों द्वारा भारतीयों के व्यापार एवं दुकानों पर हमले किए गए।

Indian car Rally

हमले के वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट

ऑस्ट्रेलिया में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे, और पिछले साल सिडनी के क्वेकर्स हिल में एक ऐसे विरोध प्रदर्शन में, जहाँ विशाल और उनके दोस्त भारत-विरोधी, झूठी बयानबाजी का विरोध करने गए थे, उन पर खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों ने हमला बोल दिया।


Sidney fight

सिडनी में खालिस्तान समर्थकों एवं भारतीय युवकों के बीच हुई मुठभेड़ 

सिडनी में भारतीयों पर हमले के वीडियो भी सामने आए


इस दौरान सिडनी के एक गुरुद्वारे से तिरंगे के जलाए जाने का भी समाचार आया। इस घटना के प्रतिकार में भारतीय छात्रों द्वारा भी खालिस्तानी झंडा जलाया गया। 

उसी समय ऐसी कई ‘टिक-टॉक’ वीडियो इंटरनेट पर आने लगी, जिनमें भारतीयों द्वारा भी खालिस्तानी समर्थकों के विरोध में कार रैली एवं प्रदर्शन किए जाने लगे।

ऐसा ही एक मौका ढूँढकर खालिस्तानियों ने मीडिया एवं पुलिस में यह नैरेटिव रचते हुए विशाल पर निशाना साधा और उसे फँसवाया। दावा किया गया कि हिंदुओं द्वारा पगड़ी पहनने वाले सिखों पर हमले किए जा रहे हैं।

अब क्यों जागी पुलिस ?

अन्य सभी जातिवादी हमलों पर शांत रहने वाला ऑस्ट्रेलियाई मीडिया एवं पुलिस इस मामले पर ही क्यों जागे तथा विशाल की गिरफ्तारी हुई इसका उत्तर वहाँ की जनसांख्यिकी (Demography ) है। 

भारत में 2% की आबादी रखने वाले सिख ऑस्ट्रेलिया में एक भारी ‘वोट बैंक’ हैं। 5 लाख भारतीय प्रवासियों में दो तिहाई का बहुमत सिख समुदाय ही रखता है।

ऐसे में इन खालिस्तानी समर्थकों द्वारा इस बात का फायदा उठाकर प्रशासन एवं मीडिया को अपने खेमे में करना कोई मुश्किल कार्य नहीं था।

विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उस पर साल 2018 का मुकदमा भी ठोक दिया गया, जिसकी व्याख्या पुलिस ने अब तक नहीं की है। भारतीय हाई कमीशन को भी विशाल से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। डायबिटीज़ की बिमारी के शिकार विशाल को न तो कई दिनों तक जेल में अपने परिवार-दोस्तों से मिलने दिया गया, न ही दवा उपलब्ध कराई गई।  

विशाल के वकील ने यह भी बताया है कि जेल के अंदर एक खालिस्तानी समर्थक सिख सिपाही द्वारा उसे यातनाएँ भी दी गईं।

विशाल की कहानी हर भारतीय तक पहुँचना और अधिक आवश्यक इसलिए भी है क्योंकि न जाने ऐसे कितने भारतीयों को विदेशों में आपसी रंजिश के आधार पर या केवल हिंदू पहचान देखकर निशाना बनाया जाता है। भारत सरकार को भी इस विषय में सोचने एवं संज्ञान लेने की आवश्यकता है। 



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