सत्ता में आते ही भारत से वापस ले लेंगे अपने 3 इलाके: पूर्व नेपाली PM केपी ओली

27 नवम्बर, 2021
पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री का कहना है कि सत्ता में आते ही वो भारत से 'अपने इलाके वापस' ले लेंगे

भारत के पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने देश की जनता से वादा किया है कि यदि उनकी मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल सत्ता में वापस आती है, तो वो भारत से कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख के क्षेत्रों को ‘वापस’ ले लेंगे। 

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने भारत से लगी सीमाओं को ले कर इस प्रकार की बयानबाजी की हो। लिपुलेख दर्रा कालापानी के पास एक सुदूर पश्चिमी इलाके में स्थित है। इस बिंदु को लेकर नेपाल भारत के साथ निरंतर विवाद की ही स्थिति में रहा है।

नेपाल अक्सर दावा करता है कि कालापानी उसका अभिन्न अंग है। वहीं, भारत यह दावा करता है कि यह उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले का ही एक हिस्सा है और यह नेपाल-धारचूला जिले का भाग है।

अपने एक बयान में केपी ओली ने कहा कि वो बातचीत के जरिए समस्याओं के समाधान के पक्ष में हैं न कि पड़ोसियों से दुश्मनी के पक्ष में।

रिपोर्ट के अनुसार, ओली ने शुक्रवार (26 नवम्बर, 2021) को काठमांडू से 160 किलोमीटर दक्षिण में स्थित चितवन में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के 10वें आम सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में यह बयान दिया है। 

पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल नेपाल में अगले साल होने वाले आम चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरेगी। उल्लेखनीय है कि भारत द्वारा उत्तराखंड राज्य में लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क 08 मई, 2020 को खोले जाने के बाद दोनों राष्ट्रों के मध्य द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।

तब नेपाल ने भारत का यह कहते हुए विरोध किया था कि यह सड़क नेपाल के इलाके से होकर गुजरती है। इसके कुछ दिनों बाद ही नेपाल ने पिथौरागढ़ के लिपुलेख और कालापानी को अपने क्षेत्रों के रूप में दिखाते हुए एक नया नक्शा सामने लाया था। भारत ने इसे नेपाल की बचकाना हरकत बताया था। 

इस नक़्शे में नेपाल ने सिर्फ उत्तराखंड राज्य से लगने वाली 805 किलोमीटर सीमा में ही बदलाव किया था, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ ही चीन से लगती सीमा को पूर्ववत ही रखा।

राम जन्मभूमि नेपाल में होने का किया था दावा

बता दें कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस प्रकार की बेहूदा बयानबाज़ी की हो। वे लम्बे समय से अपने बेबुनियादी बयानों के चलते भारत समेत आस-पास के देशों का ध्यान अपनी ओर खींचे जाने को लेकर जाने जाते रहे हैं।

गत वर्ष 13 जुलाई को नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख ने अपने एक बयान में कहा था कि असली ‘अयोध्या’ नेपाल में स्थित है और श्री राम दक्षिणी नेपाल के थोरी में जन्मे थे।

ओली के इस बयान की भारत के साथ-साथ नेपाल में भी खूब आलोचना हुई थी। बता दें की ओली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खासे करीबी माने जाते हैं।

नेपाल के कुछ राजनीतिक दलों और लोगों का यहाँ तक कहना है कि वे अपने देश से अधिक चीन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए वफादार हैं। इसी कारण वे उन्हें खुश करने ले लिए अक्सर इस प्रकार की भारत विरोधी बयानबाज़ी करते दिखते हैं।



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