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ऐसे गड़े मुर्दे हर रोज उखड़ने चाहिए, जो भारत का विस्मृत सत्य उजागर करते हों

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हजारों वर्ष पहले महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में जिन जलधाराओं के प्रवाह का चित्रण किया है, वे चित्रकूट में आज भी वैसी ही देखी जा सकती हैं। वे प्रश्न करते हैं-‘हमारी पौराणिक घटनाओं और प्रसंगों की वैज्ञानिकता को सिद्ध करने का उत्तरदायित्व किसका था?’

1942 की ‘रोटी’: हिन्दू प्रतीकों का उपहास का दौर बहुत पुराना है

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अशरफ खान नाम के एक गोलमटोल एक्टर पर फिल्माया गया, उन्हीं की आवाज में गीतकार सफदर आह का लिखा एक गाना है-‘बड़े तुम धर्म वाले हो, ये अच्छा काम करते हो, गरीबों पर दया करके, बड़ा अहसान करते हो।’