भास्कर समूह ने किया 700 करोड़ रुपयों का हेरफेर, आयकर विभाग की रेड में खुलासा

25 जुलाई, 2021
भास्कर समूह द्वारा भारी टैक्स घोटाला

दैनिक भास्कर समूह पर बड़ी आयकर विभाग (IT) की रेड में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। आयकर विभाग ने इस रेड के दौरान पाया कि भास्कर समूह द्वारा टैक्स की रकम में लगभग 700 करोड़ रुपयों का घोटाला किया गया है।

आयकर विभाग ने बृहस्पतिवार (22 जुलाई, 2021) को भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित ‘दैनिक भास्कर’ समूह के कई दफ्तरों पर रेड करी थी। मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत 32 अन्य परिसरों पर आईटी द्वारा छापा मारा गया। जहाँ भास्कर समूह द्वारा इसे मीडिया पर हमले की बात कह कर मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास किया गया, तो वहीं दो दिन बाद ही आयकर विभाग ने भास्कर समूह का कच्चा चिट्ठा सामने प्रस्तुत कर दिया।


घोटाले में कर्मचारियों का इस्तेमाल

आयकर विभाग ने जाँच के दौरान पाया कि भास्कर समूह द्वारा अपने कर्मचारियों के नाम पर कई शेल कंपनियाँ चलाई जा रही थीं। इसमें बिना कर्मचारियों की इच्छा के उन्हें कंपनियों का डायरेक्टर और ‘शेयर होल्डर’ बनाया गया था। आयकर विभाग की ओर से बताया गया कि:

“छापेमारी में पता चला है कि वे अपने कर्मचारियों के नाम पर कई कंपनियाँ चला रहे थे, जिनका उपयोग धन को इधर-उधर करने के लिए होता था। छापेमारी के दौरान कई कर्मचारियों ने यह कबूल भी किया कि उनके नाम से चलाई जा रही कंपनियों के विषय में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने आधार कार्ड एवं डिजिटल हस्ताक्षर भरोसा करते हुए कंपनी को दिए थे।”

इसके साथ ही कुछ ऐसे रिश्तेदार भी पाए गए, जिन्होंने अपनी इच्छा से भी कागज़ातों पर हस्ताक्षर किए, परंतु उन्हें भी उनके नाम से खोली गई कंपनियों द्वारा की जा रही गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

आयकर विभाग द्वारा अनुमान लगाया जा रहा कि भास्कर समूह ने ऐसी लगभग 100 कंपनियाँ खोल रखी थीं। बता दें कि इस विषय में अभी आयकर विभाग की जाँच जारी है।

विभाग द्वारा ‘दैनिक भास्कर’ समूह का नाम नहीं लिया गया, परंतु सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज़ (CBDT) ने ‘6,000 करोड़ के प्रमुख समूह’ और ‘मीडिया’ ‘रियल एस्टेट’ ‘विद्युत’ एवं ‘कपड़ा व्यापार’ से संबंध रखने वाली कंपनी कहकर व्याख्या की है कि विवरण डीबी समूह से संबंधित ही है।

लगभग 700 करोड़ की हेरफेर

विभाग ने आगे बताया की शेल कंपनियों के माध्यम से और फ़र्ज़ी खर्चे दिखाने जैसी तकनीकों का उपयोग कर अब तक 6 साल की अवधि में भास्कर समूह द्वारा लगभग 700 करोड़ रुपयों की हेराफेरी की जा चुकी है, हालाँकि इन आँकड़ों की मात्रा अधिक भी हो सकती है क्योंकि भास्कर ने कई तकनीकों का इस्तेमाल किया है जिन पर विभाग द्वारा अभी भी जाँच जारी है। 

यह कंपनीज़ एक्ट के नियम S.2(76)(vi) को तोड़ता है तथा SEBI द्वारा लिस्टिड कंपनियों के लिए बताए गए लिस्टिंग एग्रीमेंट के क्लॉज़ 49 की भी अवहेलना करता है। विभाग ने कहा है कि मामले में बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम यानी एप्लीकेशन ऑफ बेनामी ट्रांजैक्शन प्रोहिबिशन एक्ट के तहत भी जाँच की जाएगी।



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