'तकनीकी समस्या' से गालीबाज देवदत्त पटनायक का 'सरकारी कार्यक्रम' नहीं होगा प्रसारित: जानिए पूरा विवाद

12 जनवरी, 2022 By: DoPolitics स्टाफ़
आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में भारत सरकार ने देवदत्त पटनायक को आमंत्रित किया जोस पर बहस चल रही है

केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन ‘आजादी का अमृत महोत्सव 2022’ का आयोजन कराया जा रहा है, जिसे ‘नेशनल यूथ फेस्टिवल’ भी कहा जा रहा है। इस कार्यक्रम में ऐसी विभिन्न चर्चित हस्तियों को निमंत्रण दिया गया है जो देश की युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा में प्रेरित कर सकती हैं।

इस आयोजन में कथित लेखक और गालीबाज इतिहासकार देवदत्त पटनायक को भी अतिथि के रुप में निमंत्रण भेजा गया, जिस पर सोशल मीडिया पर खासा बवाल मचा हुआ है और लोग इसकी भारी आलोचना कर रहे हैं।

हालाँकि, विवाद के बाद मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि ‘तकनीकी खामियों’ के चलते पटनायक का कार्यक्रम प्रसारित नहीं किया जा सकेगा। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने यह जानकारी ट्वीट की है।

आजादी का अमृत महोत्सव 2022 या नेशनल यूथ फेस्टिवल के डिजिटल पोस्टरों और साझा की गई पोस्ट्स में स्वयं को लेखक बताने वाले देवदत्त पटनायक का भी नाम और तस्वीर देखी गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग खासे नाराज़ हो गए और केंद्र सरकार समेत इस क्षेत्र के मंत्री अनुराग ठाकुर और निसिथ प्रमानिक से भी सवाल जवाब करने लगे।


दरअसल देवदत्त पटनायक विभिन्न अवसरों पर सोशल मीडिया मुख्यतः ट्विटर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते, महिलाओं को लेकर गाली-गलौज करते और कई बार इतिहास और हिंदुओं की कथाओं और शास्त्रों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते देखे जाते हैं। 

इसी को देखते हुए ट्विटर पर नेशनल यूथ फेस्टिवल के अमृत महोत्सव से संबंधित ट्वीट पर कई लोगों ने अपने विचार रखे, जिसमें उन्होंने अनुराग ठाकुर और अन्य नेताओं से ये सवाल किए देवदत्त पटनायक को इस पैनल में क्यों रखा गया है?

ऐसा व्यक्ति जो लोगों को माँ-बहनों के नाम से गालियाँ देता है और हिंदुओं के शास्त्रों को लेकर गलत व्याख्या करता है उसे यहाँ जगह क्यों दी जा रही है? इसके साथ ही पटनायक का इस बात पर भी मज़ाक उड़ा कि यह व्यक्ति युवाओं को प्रेरित कैसे कर सकता है?


साथ ही, लोगों ने पटनायक के कई ऐसे पुराने पोस्ट भी साझा किए जिनमें उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और लोगों को गालियाँ दी हुई हैं। लोगों ने पटनायक को महिला विरोधी और मिसोजिनिस्ट कहकर भी बुलाया।  



सर्वोच्च न्यायालय के वकील शशांक शेखर झा ने इस विषय में अपनी नाराज़गी दर्ज कराते हुए देवदत्त पटनायक के निमंत्रण को खारिज करने की माँग की। उन्होंने अनुराग ठाकुर, किरन रिजिजू समेत प्रधानमंत्री मोदी को भी टैग करते हुए ट्वीट किया।


लोगों ने पटनायक के विरोध के साथ-साथ सत्ताधारी पार्टी भाजपा की भी आलोचना की और कहा कि भाजपा हिंदू घृणा करने वालों को मंच देने में कभी पीछे नहीं हटती है और तब भी कई लोग पूछते हैं कि 8 वर्षों बाद भी ये लोग (भाजपा) मीडिया नैरेटिव बनाने में क्यों नाकाम रहे हैं?


पैनल से हटाने का दावा 

बता दें कि नेशनल यूथ फेस्टिवल के ट्विटर हैंडल से सभी मेहमानों को लेकर बुधवार की सुबह ट्वीट किए गए, जिनमें देवदत्त पटनायक का नाम नहीं था और कुछ ट्विटर हैंडल इस प्रकार के दावे भी कर रहे हैं कि मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया पर भारी आलोचना के बाद देवदत्त पटनायक को पैनल से हटा दिया गया।


शेफाली वैद्य समेत कई लोगों ने इस विषय में ट्वीट करते हुए लिखा कि मंत्रालय के इस सकारात्मक कदम से वे खुश हैं। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल यूथ फेस्टिवल से इस विषय में आधिकारिक पुष्टि की माँग भी की।




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