मुस्लिमों को 80% छात्रवृत्ति देने के लिए SC जाएगी केरल सरकार, HC ने रद्द किया था आदेश

24 जुलाई, 2021
मुस्लिम वोटबैंक का विश्वास हासिल करने के लिए सीएम विजयन का एक दाँव

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बृहस्पतिवार (22 जुलाई, 2021) को केरल विधानसभा को सूचित किया कि सरकार विवादास्पद अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति मुद्दे पर केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

मुख्यमंत्री विजयन ने केरल विधानसभा में बताया कि सरकार वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरन द्वारा दी गई कानूनी सलाह के आधार पर उच्चतम अदालत का रुख कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर विवाद अनुचित था।

बता दें कि इसी साल मई माह में केरल उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक समुदायों, मुस्लिमों, लैटिन कैथोलिकों और ईसाई धर्मांतरितों के लिए योग्यता-सह-साधन छात्रवृत्ति आवंटित करने के केरल सरकार के 2015 के आदेश को रद्द कर दिया था।

इस छात्रवृत्ति में 80% धन मुस्लिम समुदाय के लिए और सिर्फ 20% धन ईसाई समुदाय के लिए आरक्षित था। जजों ने राज्य सरकार के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों का उप-वर्गीकरण और 80:20 के अनुपात में छात्रवृत्ति प्रदान करना कानूनी रूप से असंगत और भेदभावपूर्ण है।

मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की बेंच ने आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को नवीनतम जनसंख्या जनगणना के आधार पर अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को समान रूप से छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए उचित आदेश पारित करने का भी निर्देश दिया था।

बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार ईसाई और मुस्लिम समुदायों की जनसंख्या क्रमशः 18.38% और 26.56% है, जबकि बौद्ध, जैन और सिख 0.01 % हैं। मुस्लिमों की अल्पसंख्यक आबादी 58.67% है, ईसाई 40.6% और अन्य समुदाय 0.73% हैं।

अदालत का आदेश रोमन कैथोलिक समुदाय के सदस्य जस्टिन पल्लीवथुक्कल द्वारा दायर एक जनहित याचिका के आधार पर आया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने बिना किसी तर्क के एक अल्पसंख्यक समुदाय को दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ समर्थन देकर योजना को लागू करते हुए स्पष्ट भेदभाव दिखाया।

अदालत ने भी याची की बात से सहमत होते हुए अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति के आवंटन में पारित आदेश में मुस्लिम समुदाय के पक्ष में स्पष्ट भेदभाव किया गया है।

हाईकोर्ट के फैसले का मुस्लिम संगठन कर रहे थे विरोध

केरल के विभिन्न चर्च और ईसाई संगठनों ने हाईकोर्ट में इस आदेश का स्वागत किया था, जबकि मुस्लिम संगठन ने आरोप लगाया था कि यह आदेश उनके समुदाय के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि 2015 का राज्य सरकार का आदेश मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन को देखते हुए सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर आधारित था।

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि छात्रवृत्ति में ईसाइयों को 20% छात्रवृत्ति देना भी गलत था। राज्य के मुस्लिम संगठन राज्य सरकार पर हाईकोर्ट के आदेश को लागू नहीं करने का दबाव डाल रहे हैं। हालाँकि कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति के लिए आवंटित धन को बढ़ाकर अनुपात 60:40 कर दिया था, ताकि मुस्लिम समुदाय को मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि कम न हो।

ऐसा करके राज्य सरकार ने ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की थी लेकिन मुस्लिम संगठनों ने राज्य के इस कदम का भी विरोध किया और 80:20 का अनुपात बनाए रखने के लिए राज्य सरकार पर दबाव डाला। धार्मिक इस्लामिक संस्थाओं सहित लगभग सभी मुस्लिम संगठनों ने इस मुद्दे पर कोर्ट का आदेश लागू करने पर सरकार की खुलेआम निंदा की।

‘वोट बैंक’ की चिंता में सुप्रीम कोर्ट जाएगी केरल सरका

इसके अलावा केरल मुस्लिम लीग ने राज्य में अपना खोया हुआ राजनैतिक आधार वापस पाने के लिए इस मुद्दे को जोर शोर से उठाना शुरू कर दिया है। पिछले चुनाव में मुस्लिम लीग का वोट बैंक खिसक कर माकपा के पास चला गया था। मुस्लिम लीग इस मुद्दे को चुनावों में भुनाने और अपना वोट बैंक वापस पाने के हाथों हाथ ले रही है।

मुस्लिम लीग के इस राजनीतिक कदम और मुस्लिम संगठनों के विरोध के चलते राज्य सरकार और सत्तारूढ़ एलडीएफ पर अपना फैसला बदलने का दबाव बढ़ रहा था।

छात्रवृत्ति आवंटन मामले में राज्य सरकार का हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का नवीनतम कदम अपने मुस्लिम वोट बैंक को बरकरार रखने और मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए ही है।



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