₹80 करोड़ चंदे से 5 साल में बनाईं 103 मस्जिदें.. CAA-विरोधियों को मदद: J&K तक फैला है धर्मांतरण गैंग का बिजनेस

28 अगस्त, 2021
गुजरात पुलिस ने जबरन धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ किया है

गुजरात में धर्मान्तरण रैकेट चलाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को बड़ोदरा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बड़ोदरा पुलिस ने बताया है कि गिरफ्तार आरोपितों ने देश के अलग-अलग 5 राज्यों में अब तक 100 से ज्यादा मस्जिदों का निर्माण करवाया है। विदेशों से आए इस चंदे से सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद भी प्रदान की गई।

गुजरात को बड़ोदरा पुलिस ने देश मे बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराने वाले एक गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर धर्मान्तरण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। रैकेट चलाने वाले दोनों आरोपितों से पूछताछ में धर्मान्तरण के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। आरोपितों ने पिछले 5 सालों में देश भर में 103 मस्ज़िदों का निर्माण करवाया है।

लखनऊ से धरे गए दोनों आरोपित – मोहम्मद उमर गौतम और सलाउद्दीन शेख, वर्तमान में लखनऊ की जेल में बंद हैं और वडोदरा पुलिस की टीम एक स्थानीय अदालत द्वारा जारी पेशी वारंट के साथ वहाँ पहुँची है।

दोनों आरोपितों ने धर्मान्तरण और मस्जिद निर्माण के लिए धन विदेशों से हवाला के जरिये प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार इन लोगों को पिछले 5 सालों में 60 करोड़ रुपए हवाला के जरिए मिला है। सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों को धर्मान्तरण के लिए विदेशी फंडिंग भी मिलती थी।

वडोदरा पुलिस आयुक्त शमशेर सिंह ने ट्विटर पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होने बताया कि धर्मांतरण रैकेट चलाने के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

वडोदरा पुलिस कमिश्नर ने ये भी खुलासा किया कि पिछले 5 सालों में आरोपितों को हवाला (Hawala) के जरिए 60 करोड़ रुपए के साथ-साथ विदेशी चंदे (Foreign Donations) के रूप में 19 करोड़ रुपए मिले हैं। सिंह ने बताया कि ये सारा पैसा हवाला के जरिए दुबई के रास्ते आता था।

पुलिस कमिश्नर ने ये भी बताया कि आरोपितों को धर्मान्तरण के लिए एक ट्रस्ट के जरिए यूके, यूएस और यूएई से विदेशी चंदा भी मिलता था। ये लोग इस धन से पिछले पाँच सालों में देश के अलग अलग 5 राज्यों में 103 मस्जिदों का निर्माण करवा चुके हैं।

सिंह ने बताया कि हवाला के जरिए आए धन का इस्तेमाल सिर्फ धर्मांतरण या मस्जिद निर्माण के लिए ही नहीं हो रहा था बल्कि इस फंडिंग का इस्तेमाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों और कुछ संदिग्ध घटनाओं में भी किया गया। उन्होंने बताया कि आरोपितों में सम्बन्ध जम्मू-कश्मीर के कुछ संदिग्ध लोगों से भी सामने आए हैं।

जून में उत्तर प्रदेश एटीएस ने भी पकड़ा था धर्मान्तरण गिरोह

इससे पहले (20 जून 2021) को यूपी एटीएस द्वारा भी ऐसे ही एक धर्मान्तरण गिरोह को पकड़ा गया था, जिस पर हजारों गैर-मुस्लिमों के धर्मांतरण का आरोप है। हिंदुओं का अवैध धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह के दो सदस्यों- जहाँगीर आलम और उमर गौतम के पकड़े जाने के बाद इस गिरोह की परतें उखड़नी शुरू हुईं।

गौरतलब है कि इसी गैंग से जुड़े दो व्यक्ति- विपुल उर्फ रमज़ान और काशिफ़ 2 जून, 2021 की शाम को डासना देवी मंदिर परिसर में अवैध रूप से घुसे थे। कथित रूप से दोनों व्यक्ति मन्दिर के महंत स्वामी नरसिंहानंद की हत्या के इरादे से आए थे। उनके पकड़े जाने के बाद ही इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

महंत की हत्या करने के इरादे से आए दोनों आरोपितों से पूछताछ और पुलिस जाँच में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि दोनों आरोपित विपुल (रमज़ान) तथा कासिफ धर्म परिवर्तन कराने वाले एक बड़े गिरोह से संबंध रखते हैं, जिसने सुनियोजित योजना के तहत उत्तर प्रदेश के कई शहरों और गाँवों में हज़ारों हिंदुओं का धर्मांतरण करवाया है।

उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों, जैसे- नोएडा, कानपुर, मथुरा, काशी में यह गिरोह सक्रिय था। इसके साथ ही देश के अन्य प्रदेशों में भी यह गिरोह कार्य कर रहा है। उमर ने स्वयं ही यह स्वीकार किया है कि उसने अब तक लगभग हज़ार गैर-मुस्लिमों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित कराया है।

इस गिरोह का मुख्य शिकार मूक-बधिर बच्चे तथा महिलाएँ हैं। जाँच में सामने आया कि इस गिरोह नें नोएडा डेफ सोसाइटी जनपद गौतमबुद्ध नगर में मूक-बधिरों के एक स्कूल के बच्चों को नौकरी, शादी, पैसे के प्रलोभन देकर इस्लाम में परिवर्तित कराया है।

इस गिरोह को भी कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भारी मात्रा में धन उपलब्ध कराया जा रहा था। इस कार्य के लिए इनका कार्यालय इस्लामिक दवाह सेंटर (IDC) जामिया नगर के जोधाबाई एक्सटेंशन में स्थित था। इसी कंपनी के बैंक खाते में ISI समेत कई विदेशी संस्थाओं द्वारा पैसा भेजा जाता था।



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