UP: अलकायदा से जुड़े संदिग्ध आतंकियों की कानूनी लड़ाई लड़ेगा 'रिहाई मंच'

13 जुलाई, 2021

यूपी एटीएस ने रविवार को अलकायदा से जुड़े दो सन्दिग्ध आतंकियों को लखनऊ से पकड़ा है, जो 15 अगस्त से पहले देश को बम-धमाकों से दहलाने की साज़िश रच रहे थे। लखनऊ से पकड़े गए इन संदिग्ध आतंकियों, मिनहाज और मुशीरुद्दीन के घर सोमवार को रिहाई मंच (Rihai Manch) के कार्यकर्ता पहुँचे और संदिग्धों के परिवार को उनकी ‘कानूनी लड़ाई’ लड़ने का आश्वासन दिया।

रिहाई मंच जब दुबग्गा में मिनहाज के घर पहुँचा तो बाहर से ताला लगा हुआ था। दरअसल मिनहाज़ की गिरफ्तारी के बाद से ही उसके घर पर ताला लगा हुआ था और ऐसा लगता था कि परिजन घर छोड़कर कहीं चले गए। लेकिन जैसे ही रिहाई मंच के कार्यकर्ता मिनहाज के घर पहुँचे, बाहर से ताला खुल गया और मिनहाज के पिता सिराज रिहाई मंच से जुड़े लोगों को घर के अंदर ले गए।


मिनहाज के पिता सिराज रिहाई मंच से जुड़े लोगों के साथ

दरअसल लोगों के सवाल-जवाब से बचने के लिए मिनहाज के पिता ने मेन गेट पर बाहर से ताला डाल रखा था। बाकी के परिवार ने खुद को घर में बन्द कर लिया था। सन्दिग्ध अलकायदा आतंकी मिनहाज के परिजनों से काफी लम्बी मुलाकात के बाद रिहाई मंच के कार्यकर्ता बाहर निकले और सरकार पर कई गम्भीर आरोप लगाए हैं।

रिहाई मंच ने मिनहाज के अलावा दूसरे सन्दिग्ध आतंकी मुशीरुद्दीन के परिजनों से भी मुलाकात की। फातिमा नगर, मोहिबुल्लापुर के मुशीरुद्दीन के घर मे उसकी की पत्नी सईदा, बच्चे और पिता थे जिनसे रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शोएबब, हासचिव राजीव यादव, अजय तोरिया, टीनू, मुराद आदि ने मुलाकात की।

रिहाई मंच लड़ेगा पकड़े गए सन्दिग्ध अलकायदा आतंकियों का केस

परिजनों से मुलाकात के बाद रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने पकड़े गए सन्दिग्ध आतंकियों को निर्दोष बताते हुए कहा कि 2022 का चुनाव आ रहा है, ऐसे में वोटों के ध्रुवीकरण करने के लिए निर्दोषों को फँसाने का पूरा खेल किया जा रहा है। सरकार पर आरोप लगाते हुए रिहाई मंच ने इसे चुनावी हथकंडा करार दिया।

रिहाई मंच का दावा है कि पहले भी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़े गए कई लोग निर्दोष साबित हो चुके हैं। मंच की ओर से कहा गया कि मिनहाज और मुशीर के केस की पैरवी रिहाई मंच करेगा।


धर्मांतरण करने वाले गिरोह की पैरवी करने भी आया था रिहाई मंच

इससे पहले, रिहाई मंच ने लखनऊ एटीएस द्वारा पकड़े गए ‘अवैध धर्मान्तरण’ के आरोपितों का केस लड़ने की बात भी कही थी। रिहाई मंच ने मार्च, 2017 में हाजी कॉलोनी में कथित आतंकी सैफुल्ला के एनकाउंटर पर भी सवाल उठाए।

इस बीच मीडिया से बात करने से बच रहे सन्दिग्ध आतंकी मिनहाज के पिता सिराज ने काफी देर बाद कहा कि वो सदमे में हैं। एटीएस की कार्रवाई पर उन्होंने पूरी तरह संतुष्ट होने की बात कही, हालाँकि मिनहाज के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के सवाल पर वो बिना कोई जवाव दिए अंदर चले गए।

आसपास के लोग भी मिनहाज के बारे में ज्यादा जानकारी देने से बचते नज़र आए। पड़ोसियों के कहना है कि मिनहाज घर से बाहर बहुत कम निकलता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था।

रिहाई मंच ‘अवैध धर्मांतरण गिरोह’ का भी लेता है पक्ष

इससे पहले आजमगढ़ में धर्मांतरण के आरोप में पकड़े गए तीन आरोपितों के परिजनो से भी रिहाई मंच के सदस्यों ने मुलाकात की थी। गिरफ्तार आरोपितों का केस लड़ने की हामी भरते हुए रिहाई मंच ने कहा था कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अध्यादेश 2020, दरअसल अनुसूचित जाति/जनजाति विरोधी है और इसे लव जिहाद के नाम पर मुस्लिम विरोधी हथियार के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

यूपी एटीएस द्वारा हाल ही में पकड़े गए ‘अवैध धर्मान्तरण गैंग’ के सदस्यों मोहम्मद उमर गौतम और मुफ़्ती काजी जहाँगीर कासमी को भी कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी भी रिहाई मंच से जुड़े ने लेने की बात कही थी।

रिहाई मंच का कहना है कि उमर गौतम का ये बयान कि उसने 1000 से ऊपर व्यक्तियों का धर्म परिवर्तन करवाया है, विश्वसनीय नहीं है। रिहाई मंच ने कोरेगांव हिंसा में आरोपित कथित माओवादी फादर स्टेन की मौत को भी ‘सरकारी हत्या‘ बताया था।


मंच का आरोप था कि ये केवल सनसनी पैदा करके वोटों का ध्रुवीकरण करने के मकसद ने दिलवाया गया प्रतीत होता है। मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब का कहना था कि पुलिस अभिरक्षा में किसी अभियुक्त का ऐसा बयान किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना सन्दिग्ध प्रतीत होता है।

क्या है ‘रिहाई मंच’

रिहाई मंच नामक संगठन की स्थापना लखनऊ के रहने वाले मोहम्मद शोएब ने की थी। मोहम्मद शोएब पेशे से वकील हैं। इस मंच के ज़रिए ये लोग विभिन्न आतंकी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल मुस्लिम युवाओं की कानूनी मदद करते हैं। ये मदद ग़रीबी या किन्हीं अन्य विवशताओं के नाम पर की जाती है लेकिन मकसद मज़हबी ही होता है।

मोहम्मद शोएब खुद भी 19 दिसम्बर को हुए नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में जेल जा चुके हैं। रिहाई मंच कथित रूप से पढ़े लिखे सेकुलर बुद्धिजीवियों का संगठन है, लेकिन मंच की कार्यशैली और बयान कहीं से भी कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों से कम नहीं है।

पढ़े लिखे लोगों का रिहाई मंच इस बात पर कड़ी आपत्ति जताता है कि बिना जाँच के मुस्लिम आरोपित को आतंकी बता दिया जाता है। लेकिन यही रिहाई मंच बिना किसी जाँच के किसी सन्दिग्ध मुस्लिम की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही उसे निर्दोष बता कर उसको कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने को तैयार हो जाता है।

रिहाई मंच सबूतों के अभाव में बरी हुए कुछ आरोपितों का उदाहरण देकर अपना अजेंडा चलाता है लेकिन उपलब्ध सबूतों के आधार पर सैकड़ों मुस्लिम आतंकियों को हुई सजा पर वो कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए जाँच और सबूतों पर ही सवालिया निशान लगा देता है।

रिहाई मंच को लगता है देश मे जो आतंकी घटनाएँ घटित होती हैं, या जो बम फटते हैं, वो या तो पृथ्वी की नीचे चट्टानों के खिसकने से होते हैं या फिर मोदी के इशारे पर खुद अमित शाह साइकिल पर रखकर वो बम रात के अंधेरे रख आते हैं।



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