'हिंदू' स्वरा भास्कर का सर्टिफिकेट 'कॉमरेड्स' ने क्यों किया 'कैंसिल'

27 अगस्त, 2021
स्वरा भास्कर को वाम ब्रिगेड ने किया 'कैंसिल'

अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा अपने नए घर के गृह प्रवेश की पूजा के कुछ चित्र सोशल मीडिया पर साझा किए गए। इसके बाद दलित समाज के कुछ कथित नेता स्वरा भास्कर की आलोचना करने मैदान में उतर आए एवं उनका अंबेडकरवादी होने का सर्टिफिकेट छीन लिया गया।

स्वयं को दलितों का प्रतिनिधि एवं नेता कहने वाले कुछ लोग ट्विटर पर केवल ब्राह्मण एवं हिन्दू घृणा से इतर कुछ करते नहीं दिखते हैं। इन लोगों का मुख्य अजेंडा दलितों का भला नहीं है अपितु हिंदू धर्म एवं इसकी रीतियों को गाली देना और आलोचना करना ही है। इसका प्रमाण हाल ही में देखने को मिला। 

बहुचर्चित अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने बृहस्पतिवार (26 अगस्त, 2021) को अपने नए घर के गृह प्रवेश की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। इसमें स्वरा हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा अर्चना करती दिखीं।

जहाँ एक धड़ा उनके इस अवतार को देखकर अचंभित हो गया। वहीं स्वयं को अंबेडकरवादी बताने वाले दलितों के कुछ कथित रक्षक इसे स्वरा का दोहरा चरित्र बताते हुए उनकी आलोचना करने लगे।

दिलीप मंडल ने साधा निशाना 

स्वयं को पत्रकार लिखने वाले कथित अंबेडकरवादी दिलीप मंडल ने इस मामले में स्वरा पर आक्रमण प्रारंभ किए। मंडल ने लिखा कि जब स्वरा अपनी आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन करती हैं तो ऐसे में उन्हें अंबेडकरी आंदोलन के मंच पर आने से बचना चाहिए।

मंडल ने यह भी कहा कि अगर उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर को थोड़ा भी पढ़ा होता तो उन्हें पता होता कि वे हिंदू शास्त्रों को लेकर क्या सोचते थे। इसके साथ ही दिलीप मंडल ने स्वरा को अनपढ़ भी कह दिया।


इतने पर भी संतुष्ट न होकर दिलीप मंडल स्वरा की सवर्ण पहचान पर आक्रमण करते हुए एडवर्ड रॉड्रिग्ज का नाम लेते हुए लिखा:

“आधुनिकता और प्रगतिशीलता सवर्णों के लिए एक ड्रेस है, जिसे वे सुविधा और स्वार्थ के हिसाब से पहन और उतार लेते हैं। जिस क्षण वे आधुनिकता का छद्म रचते हैं, उस पल वे अपने पोंगापंथ या Tradition को टेंपररी तौर पर ढक लेते हैं। लेकिन यह उनका मूल स्वभाव नहीं है।”


लोगों ने भी बरसाया ज़हर

मंडल के साथ-साथ कई आम लोगों ने भी स्वरा भास्कर के इस कृत्य की जमकर आलोचना की एवं उन्हें ब्राह्मणवादी बताते हुए उन पर फ़र्ज़ी फेमिनिस्ट और फ़र्ज़ी क्रांतिकारी होने के आरोप भी लगाए। 




लोगों ने लिखा कि एक ओर स्वरा ब्राह्मणवाद के विरुद्ध लड़ने का दावा करती हैं वहीं दूसरी ओर वे ब्राह्मणवाद का समर्थन करती हैं। लोगों ने स्वरा के फेमिनिज्म को भी ब्राह्मनिज़्म का नाम दे दिया। 

इन लोगों ने स्वरा के बहाने ब्राह्मणों और सवर्णों पर वार करते हुए लिखा कि इस देश में ब्राह्मणवाद कभी समाप्त नहीं होगा।  


स्वरा भास्कर एक लंबे समय से हिंदू घृणा के प्रदर्शन करती दिखती हैं। इन्होंने समय-समय पर ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया है। कुछ दिनों पहले स्वरा ने हिंदू आतंकवाद की तुलना इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान से करते हुए ट्वीट किया था।

इसकी भारी आलोचना भी हुई थी। ऐसे में स्वयं को लिबरल और अंबेडकरवादी बताने वाली स्वरा को भी केवल एक पूजा की फोटो डालने मात्र के लिए पूरे वाम ब्रिगेड द्वारा कैंसिल कर दिया गया।

इससे यह साफ होता है ये वाम दल और आंबेडकरवादी हिन्दुओं और मूलतः ब्राह्मणों के प्रति अपनी ईर्ष्या को अन्य किसी भी चीज़ से अधिक प्राथमिकता देते हैं। 



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