खुद को मसीहा बताया, COVID दवाओं की जाँच तक नहीं की: बॉम्बे HC ने दिए सोनू सूद की जाँच के आदेश

16 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
हाईकोर्ट ने अभिनेता सोनू सूद और विधायक जीशान सिद्दीकी की जाँच के आदेश दिए हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (16 जून, 2021) को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एंटी-कोविड दवाओं की खरीद और आपूर्ति में कॉन्ग्रेस विधायक जीशान सिद्दीकी (Zeeshan Siddique) और फ़िल्म अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) की भूमिका की जाँच करे।

कोविड काल के समय मे जीशान सिद्दीकी और अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर मदद की अपील के बाद नागरिकों को एंटी-कोविड दवाओं की आपूर्ति की थी। इस मामले में सोनू सूद पर पहले भी कई तरह के आरोप लगते रहे।

असली-नकली जाँचें बिना बाँट दी दवाएँ

उच्च न्यायालय ने जाँच का आदेश देते हुए कहा, “इन लोगों ने खुद को किसी मसीहा के रूप में पेश किया। इन लोगों ने दवाएँ नकली थी या असली, इस बात को सत्यापित किए बिना ही दवाओं की आपूर्ति की। इन लोगों ने यह जानकारी करना भी जरूरी नहीं समझा कि इस तरह दवाओं का वितरण कानूनी है या गैर कानूनी।”

अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए कोर्ट ने कहा, “हम नहीं चाहते कि समाज में इस तरह सरकार के समानांतर कोई प्रणाली अस्तित्व में हो। हम इस तरह की स्थितियों से खुश नहीं हैं।”

कोर्ट ने कहा, “चूँकि दोनों सीधे आम जनता के साथ काम कर रहे थे, तो क्या जनता के लिए इन दवाओं की गुणवत्ता या स्रोत का पता लगाना संभव था?”

दुर्लभ आपूर्ति के बीच कैसे हासिल की जीवन रक्षक दवाएँ

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र को इस बात के जाँच करने के भी आदेश दिए हैं कि जब कोविड-19 आपदा के समय एंटी-कोविड दवाओं की आपूर्ति दुर्लभ थी और केंद्र द्वारा ही राज्यों को उसका वितरण किया जाना था, तो इन मशहूर हस्तियों और राजनेताओं ने कहाँ से और कैसे इतनी बड़ी मात्रा में एंटी-कोविड दवाएँ हासिल कर लोगों के बीच वितरित की? हाईकोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं सरकार इस मामले में गंभीरता से जाँच करें।

पिछले आदेशों पर राज्य महाधिवक्ता के जवाबों के बाद दिया जाँच आदेश

दरअसल राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने कोविड-19 से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर कोर्ट द्वारा पहले दिए गए आदेशों का जवाब देते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मझगाँव मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में एक चैरिटेबल ट्रस्ट बीडीआर फाउंडेशन और उसके ट्रस्टियों के खिलाफ सिद्दीकी को गैर कानूनी तरीके से रेमेडिसविर इंजेक्शन की आपूर्ति करने पर एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

कुंभकोनी ने हाईकोर्ट को जानकरी देते हुए बताया कि सोनू सूद को गोरेगाँव के एक निजी लाइफलाइन केयर अस्पताल के अंदर स्थित कई फार्मेसियों से एंटी-कोविड दवाएँ मिली थीं। फार्मा कंपनी सिप्ला ने इन फार्मेसियों को रेमडेसिविर की आपूर्ति की थी और इन्होंने सोनू सूद को! इस मामले की जाँच अभी भी जारी है।

कुंभकोनी ने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक जीशान सिद्दीकी केवल उन नागरिकों को दवा दे रहे थे, जिन्होंने उनसे सम्पर्क किया इसलिए उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके बाद जस्टिस एसपी देशमुख और जीएस कुलकर्णी की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को जीशान सिद्दीकी और सोनू सूद की भूमिका की जाँच के भी आदेश दे दिए।

सिर्फ ट्रस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं: HC

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने पूछा कि क्या सिर्फ चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ कार्रवाई शुरू करना ही पर्याप्त था? क्या राज्य को जीशान सिद्दीकी और सोनू सूद या अन्य संबंधित हस्तियों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए था?

कोर्ट ने कहा, “हम उम्मीद करेंगे कि राज्य सरकार उनके कार्यों की जाँच करेगी। हम चाहते हैं कि आप उनकी भूमिकाओं की बहुत गंभीरता से जाँच करें।”



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