मैं यहीं नमाज पढ़ूँगा, आपत्ति है तो नोटिस भेजो: पीतमपुरा की कॉलोनी बन गई जुम्मे की नमाज का अड्डा

05 अगस्त, 2021
दिल्ली के पीतमपुरा में दूर दूर से आकर मुस्लिम नमाज़ पढ़ते हैं।

हाल ही में दिल्ली के कई जगहों पर ऐसी घटनाएँ देखने को मिली हैं, जहाँ लोगों ने आपत्ति जताई हैं कि मजहब विशेष के लोगों द्वारा सार्वजानिक संपत्ति पर कब्ज़ा किया जा रहा है एवं सड़क या फ्लाई ओवर पर रातों-रात मजार बना दिए जा रहे हैं।

इसी प्रकार की मजहबी मानसिकता से दिल्ली स्थित पीतमपुरा के लोग भी शिकार हो रहे हैं। पीतमपुरा के FP ब्लॉक में रहने वाले लोगों ने शिकायत की है कि दूर-दूर के इलाकों से समुदाय विशेष के लोग आ कर वहाँ शुक्रवार की नमाज पढ़ते हैं।

ख़ास बात यह है कि इस गली में उन लोगों के घर तक नहीं हैं और अब, जब स्थानीय लोगों ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू की तो उन्हें वापस धमकाया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पीतमपुरा में आ कर नमाज पढ़ने का सिलसिला एक लम्बे समय से चलते आ रहा है। आखिरकार लोगों के सब्र का बाँध टूटा और उन्होंने नमाज पढ़ने आए एक व्यक्ति को टोका। इस पर इस व्यक्ति ने कहा, “मैं अबसे माइक के साथ नमाज़ पढूँगा, तुमे क्या तकलीफ़ है?”

इस वीडियो को आप नीचे दी गई यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं –


वीडियो में स्थानीय लोग नमाज पढ़ने आए मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति से कह रहे हैं कि लोगों को इस से आपत्ति है। इस पर वह व्यक्ति कहते सुना जा सकता है कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वो उन्हें नोटिस भेजें।

इस पर दूसरा आदमी उससे सवाल करता है कि क्या वो इस कॉलोनी में रहता है? जब वो यहाँ रहता ही नहीं है तो फिर वो यहाँ आकर नमाज क्यों पढ़ रहे हैं? लोग कहते हैं कि उन्हें बाहरी लोगों के कॉलोनी में आकर नमाज पढ़ने से तकलीफ है। इस पर वह व्यक्ति कहता है कि उन्हें इससे क्या तकलीफ है अगर वो नमाज पढ़ता है?

हाथ में माइक पकड़े इस व्यक्ति से लोग पूछते हैं कि आज से पहले क्या वो नमाज नहीं पढ़ते थे? अगर पढ़ते थे तो फिर अब वो हिन्दुओं के घरों के बाहर आ कर क्यों नमाज पढ़ने लगे हैं? आक्रोशित लोग पूछते हैं कि क्या ये जामा मस्जिद है जो इन साठ लोगों ने यहाँ आ कर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया है?

ऐसे ही एक अन्य वीडियो में स्थानीय लोग यह कहते देखे जा सकते हैं कि बाहरी लोगों ने आकर उनकी गली को नमाज पढ़ने की जगह बना दिया है और शुक्रवार को यहाँ पैर तक रखने की जगह नहीं होती।

बताया जा रहा है कि इस कॉलोनी में सिर्फ दो ही मुस्लिम परिवार रहते हैं, जिन्होंने कि अपने कमरे को मस्जिद में तब्दील कर दिया है। महिला का कहना है कि इस सबसे उनके बच्चे भी भयभीत हैं और उनका वहाँ रह पाना भी मुश्किल हो गया है।

महिला कहती हैं, “रात के दस बजे तक यह सब चलता रहता है। ये भीड़ सारे इलाकों से इकट्ठी की जाती है। सड़क पर लोग शुरू कर देते हैं। हम पिछले तीस सालों से यहाँ रहते हैं लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था। पहले लोग सड़क पर नमाज पढ़ते थे और बाद में उन्होंने फ़्लैट ले लिया है। हमारे बच्चे बाहर नहीं निकल पाते, बेटियाँ बाहर नहीं जा पाती हैं।”



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